समाचार सच, देहरादून।
उत्तराखंड सरकार ने सड़क हादसों में घायल लोगों की जान बचाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब किसी भी आपात स्थिति में अलग-अलग नंबर याद रखने की जरूरत नहीं होगी। सिर्फ 112 पर एक कॉल करते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड और मेडिकल टीम एक साथ सक्रिय हो जाएंगी।
नई व्यवस्था के तहत राज्य की सभी सरकारी और निजी एम्बुलेंसों को जीपीएस और वीएलटीडी (Vehicle Location Tracking Device) से लैस किया जाएगा। इनकी निगरानी सीधे 112 कंट्रोल रूम से होगी, जिससे हादसे के सबसे नजदीक मौजूद एम्बुलेंस को तुरंत मौके पर भेजा जा सकेगा।
सरकार का उद्देश्य सड़क दुर्घटना के बाद सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले ‘गोल्डन ऑवर’ में घायल को अस्पताल पहुंचाकर अधिक से अधिक जान बचाना है। इसके लिए आपातकालीन सेवाओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाया जा रहा है, जिससे राहत एवं बचाव कार्य पहले से कहीं अधिक तेज होगा।
राज्य स्तर पर डीजी हेल्थ और जिला स्तर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाया जाएगा। साथ ही सड़क हादसों से जुड़े सभी मामलों का डिजिटल रिकॉर्ड रखने के लिए राज्य स्तरीय ट्रॉमा रजिस्ट्री भी तैयार की जाएगी, जिसे आगे राष्ट्रीय ट्रॉमा रजिस्ट्री से जोड़ा जाएगा।
मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि नई व्यवस्था को जल्द लागू कर सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर इलाज, बेहतर ट्रॉमा केयर और पीएम-राहत योजना का पूरा लाभ सुनिश्चित किया जाए।

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