समाचार सच, नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों में उपनल के अलावा अन्य आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए उनकी प्रोत्साहन राशि की रिकवरी पर रोक लगा दी है। साथ ही कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को कर्मचारियों के प्रत्यावेदन पर नियमानुसार निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।
वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने इस मामले में एक साथ दायर कई याचिकाओं की सुनवाई करते हुए राजाजी नेशनल पार्क के निदेशक को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता कर्मचारी 10 दिनों के भीतर अपना प्रत्यावेदन प्रस्तुत करें। निदेशक तीन माह के भीतर विधि के अनुसार उस पर निर्णय लें। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक प्रत्यावेदन पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक कर्मचारियों से किसी भी प्रकार की रिकवरी नहीं की जाएगी। इसके साथ ही न्यायालय ने याचिकाओं का निस्तारण कर दिया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया गया कि राज्य गठन के बाद वर्ष 2014 और 2016 में उन्हें बाहरी एजेंसियों के माध्यम से विभिन्न विभागों में नियुक्त किया गया था। बाद में अलग-अलग एजेंसियों के जरिए उनकी सेवाएं जारी रहीं। वर्ष 2019 से उन्हें उपनल कर्मचारी मानते हुए विभाग में कार्य कराया जाता रहा और इसी आधार पर उन्हें प्रोत्साहन राशि भी दी गई।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि अब सरकार यह कहते हुए पूर्व में दी गई प्रोत्साहन राशि की वसूली कर रही है कि उनकी मूल नियुक्ति उपनल के माध्यम से नहीं, बल्कि अन्य आउटसोर्स एजेंसियों से हुई थी। कर्मचारियों ने इस रिकवरी को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
मामले में सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कर्मचारियों को अंतरिम राहत प्रदान करते हुए प्रोत्साहन राशि की रिकवरी पर रोक लगा दी और राजाजी नेशनल पार्क के निदेशक को निर्देशित किया कि वह निर्धारित अवधि के भीतर कर्मचारियों के प्रत्यावेदनों पर विधिसम्मत निर्णय लें।



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