नीला ड्रम हत्याकांड में जिला अदालत का सख्त रुख, हत्या के लिए 50 हजार और साक्ष्य छिपाने पर 20 हजार रुपये का जुर्माना; फैसले के बाद सौरभ के परिजनों ने जताई संतुष्टि
समाचार सच, मेरठ डेस्क।
उत्तर प्रदेश के मेरठ में चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में जिला अदालत ने बुधवार, 14 अक्टूबर को बड़ा फैसला सुनाते हुए मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई। अदालत ने दोनों को हत्या और साक्ष्य छिपाने के मामले में दोषी ठहराते हुए अपराध को बेहद क्रूरतम करार दिया। फैसले के बाद मृतक सौरभ के परिवार ने संतोष जताया, जबकि अदालत परिसर में मौजूद कुछ अधिवक्ताओं ने मिठाई बांटकर फैसले का स्वागत किया।
इस मामले में अदालत ने 30 सितंबर को दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया था और सजा सुनाने के लिए 14 अक्टूबर की तारीख तय की थी। बुधवार को दोनों की वर्चुअल माध्यम से पेशी हुई, जिसके बाद अदालत ने सजा सुनाई।
हत्या के लिए 50 हजार और साक्ष्य छिपाने पर 20 हजार रुपये का जुर्माना
वादी पक्ष के अधिवक्ता विजय बहादुर सिंह के अनुसार, अदालत ने हत्या के अपराध में मृत्युदंड के साथ 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। वहीं, शव को छिपाने और साक्ष्य मिटाने से संबंधित अपराध में सात वर्ष की सजा तथा 20 हजार रुपये का जुर्माना भी सुनाया गया है।
अधिवक्ता ने बताया कि अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष दलील दी थी कि हत्या अचानक हुए विवाद या आवेश में नहीं की गई, बल्कि इसे सोच-समझकर अंजाम दिया गया। हत्या के बाद शव के टुकड़े किए गए और उन्हें छिपाने का प्रयास किया गया। अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए अधिकतम सजा की मांग की थी।
अदालत ने मामले की गंभीरता और अपराध के स्वरूप को ध्यान में रखते हुए सख्त फैसला सुनाया। हालांकि, मृत्युदंड के मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया और अपील की स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी।
क्या था पूरा नीला ड्रम हत्याकांड?
यह सनसनीखेज मामला मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, मार्च 2025 में मुस्कान रस्तोगी ने अपने प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ मिलकर अपने पति सौरभ राजपूत की हत्या की थी। आरोप था कि हत्या के बाद शव के कई टुकड़े कर उन्हें सीमेंट के घोल के साथ नीले ड्रम में छिपा दिया गया।
घटना के बाद मुस्कान और साहिल के हिमाचल प्रदेश घूमने जाने की बात भी सामने आई थी। मामले का खुलासा होने के बाद पूरे देश में सनसनी फैल गई थी। जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला तैयार किया।
126 पेशियां, 22 गवाहों के बयान
मामले की सुनवाई जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत में हुई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सुनवाई के दौरान कुल 126 पेशियां हुईं और अभियोजन पक्ष की ओर से 22 महत्वपूर्ण गवाह पेश किए गए।
अदालत ने दोनों आरोपियों को हत्या के साथ-साथ साक्ष्य मिटाने और सबूत छिपाने से जुड़े अपराधों में भी दोषी माना। फैसले के दौरान अदालत ने अपराध की क्रूरता और समाज पर उसके प्रभाव का उल्लेख किया। सुनवाई के दौरान पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों की भूमिका मामले में महत्वपूर्ण रही।
सौरभ की मां बोलीं—हमें इंसाफ मिला
फैसला सुनाए जाने के बाद सौरभ राजपूत की मां रेनू देवी ने संतुष्टि जताई। उन्होंने कहा कि दोनों दोषियों को मृत्युदंड मिलने से उन्हें राहत महसूस हो रही है। उन्होंने न्याय दिलाने की प्रक्रिया में सहयोग करने वाले अधिवक्ताओं और अन्य लोगों के प्रति आभार भी व्यक्त किया।
वादी पक्ष के अधिवक्ता विजय बहादुर सिंह ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि मजबूत पैरवी के जरिए अभियोजन पक्ष ने अपना पक्ष रखा। उनके अनुसार, इस फैसले से गंभीर अपराधों के मामलों में कानून के प्रभावी क्रियान्वयन का संदेश जाएगा।
अधिवक्ता दीप्ति चौधरी ने भी फैसले का स्वागत किया। वहीं, अदालत के निर्णय के बाद कुछ युवा अधिवक्ताओं ने मिठाई बांटकर खुशी जताई।
मृत्युदंड के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया भी अहम
सौरभ राजपूत हत्याकांड में जिला अदालत के इस फैसले ने एक बार फिर गंभीर अपराधों में कठोर सजा और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज कर दी है। हालांकि, मृत्युदंड के मामलों में लागू कानूनी प्रक्रिया के तहत उच्च न्यायालय की पुष्टि और आगे की अपील जैसे चरण भी महत्वपूर्ण होते हैं।
फिलहाल, इस मामले में अदालत के फैसले के बाद सौरभ के परिजनों ने न्याय मिलने की बात कही है। अब आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर भी नजर रहेगी।

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