समाचार सच, हल्द्वानी। पुस्तक हमारे जीवन में बेहतर पथ प्रर्दशक हैं, हमें आगे बढ़ने के लिये पुस्तकों का सहारा लेना चाहिए। यह उद्गार कुमाऊंनी साहित्यकार एवं कवि मोहन जोशी ने व्यक्त की।

उनका कहना था कि पुस्तकों से अच्छा कोई मित्र नहीं है, जो हमें निरंतर नई प्रेरणा के साथ-साथ हमारा उत्साहवर्धन भीकरते हैं और हमारे अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करते हैं। पुस्तकों के माध्यम से हम रचनाकार के द्वारा कल्पित मनोभावों को अपने मैं जीवन में जीवन्त पाते हैं तो कभी लेखक के विचारों एवं उसके अनुभव से मार्गदर्शन पाकर अपने जीवन के पथ को सुगम बनाते हैं। पढ़ने के लिए हमें निरंतर वातावरण निर्माण की आवश्यकता है।
आजकल लॉकडाउन की स्थिति में मैं एक सामयिक कुमाऊनी का भी संकलन आँठ’ का तथा मेरी पुस्तक ‘झलक’ कुमाउनी काव्य संग्रह,. ‘मोहन गीत’ हिंदी गीतों का संग्रह, ‘मोहन गजल’ गजलों का संकलन तैयार कर रहा हूं । जिनका शीघ्र ही लोकार्पण किया जाएगा। मैंने अभी तो कुछ प्रयास किया है जिनमें मेरी किताबें ‘थुपुड़‘, हुक धैं रे’,. ‘केवल आपके लिए’, ‘मोहन गीता’, ‘आत्मा से आत्मा कथ्य – नमन केएन’., वीर शहीद अमर क्रांतिकारी और परमवीर सोमनाथ गाथा’ के साथ साथ साथ श्रीरामचरितमानस, कामायनी, भगवत गीता का कुमाऊनी भावानुवाद भी किया है। इसके साथ ही कुमाऊनी में रामलीला नाटक आदि पुस्तकें लिखी हैं इस अवसर पर मैं यह कहना चाहता हूं कि इन पुस्तकों को पाठक मिले और हमारे बेचैन दिल को सुकून।
सबसे पहले ख़बरें पाने के लिए -
👉 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें
👉 फेसबुक पर जुड़ने हेतु पेज़ लाइक करें
👉 यूट्यूब चैनल सबस्क्राइब करें
हमसे संपर्क करने/विज्ञापन देने हेतु संपर्क करें - +91 70170 85440



