जेही विधि नाथ, हुई हित मोरा करहु सो बेगी, दास मैं तोरा समाचार सच, हल्द्वानी। कुमाऊं की प्राचीनतम रामलीला मंचन के दूसरे दिन नारद मोह लीला का आनंद दर्शकों ने उठाया। जहां भगवान विष्णु ने देवर्षि नारद के मन में…


जेही विधि नाथ, हुई हित मोरा करहु सो बेगी, दास मैं तोरा समाचार सच, हल्द्वानी। कुमाऊं की प्राचीनतम रामलीला मंचन के दूसरे दिन नारद मोह लीला का आनंद दर्शकों ने उठाया। जहां भगवान विष्णु ने देवर्षि नारद के मन में…

समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व है। अगर अमावस्या तिथि पितृ पक्ष में आती है, तो इसका महत्व और बढ़ जाता है। पितृ पक्ष में आने वाली अमावस्या को सर्वपितृ अमावस्या या सर्व पितृ…

समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। हिन्दू धर्म में हर साल आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर पड़ने वाली अमावस्या को सर्वपितृ अमावस्या कहा जाता है। सर्वपितृ अमावस्या के साथ ही पितृपक्ष का समापन होता है। ऐसी मान्यता है…

समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। आज़ दिनांक ३० सितम्बर २०२४ सोमवार का पंचांग श्रीसंवत २०८१ श्रीशाके १९४६ श्री सूर्य दक्षिणायन शरद ऋतु कन्यार्क १५ गते आश्विन मास कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि सोमवार सूर्याेदय ६/१० बजे सूर्यास्त ५/५५ बजे राहु काल ७/३०…

समाचार सच, हल्द्वानी। नगर की प्राचीन श्री रामलीला कमेटी के तत्ववाधान में गणेश पूजन के साथ रामलीला मंचन का शुभारम्भ हुआ। ज्ञात हो विगत कई वर्षों से रामलीला सम्पन्न कराने का काम संचालन समिति द्वारा किया जा रहा है आज…

समाचार सच, हल्द्वानी। भारत विकास परिषद की भगत सिंह शाखा द्वारा गौधाम गंगापुर, लालकुआं में युवा पीढ़ी को गौ सेवा का महत्व जानने का अवसर प्राप्त हुआ। शाखा द्वारा बच्चों को गौ सेवा के प्रति जागरूक कर हमारी भारतीय संस्कृति…

समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। श्राद्ध पक्ष में आने वाली आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के श्राद्ध का खास महत्व है। इस श्राद्ध को करने से मृत बच्चों की आत्मा को शांति मिलती है और उन्हें नया जन्म लेने…

समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। पितृदोष के संबंध में ज्योतिष और पुराणों की अलग अलग धारणा है लेकिन यह तय है कि यह हमारे पूर्वजों और कुल परिवार के लोगों से जुड़ा दोष है। श्राद्ध तीन पीढ़ियां पितृ, पितामाह और परपितामाह…

समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। श्राद्ध पक्ष में आने वाली आश्विन माह के कृष्घ्ण पक्ष की द्वादशी के श्राद्ध को संन्यासी श्राद्ध कहते हैं। इस श्राद्ध को करने से ऋषियों का आशीर्वाद मिलता है और पितृ को मुक्ति मिलती है। इसलिए…