कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को छठ पूजा की जाती है: डॉ0 आचार्य सुशांत राज

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समाचार सच, अध्यात्म डेस्क (देहरादून)। संतान की प्राप्ति एवं सुखी जीवन के लिए हर वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को छठ पूजा होती है। इस दिन सूर्य देव की पूजा होती है इसलिए इसे सूर्य षष्ठी भी कहा जाता है। दिवाली के बाद छठ पूजा का प्रारंभ होता है। संतान की प्राप्ति एवं उसके सुखी जीवन के लिए हर वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को छठ पूजा होती है। यह व्रत मुख्यतः तीन दिनों का होता है। इस दिन सूर्य देव की पूजा होती है, इसलिए इसे सूर्य षष्ठी भी कहा जाता है। हर वर्ष दिवाली से छठे दिन छठ पूजा का आयोजन होता है। इस वर्ष छठ पूजा 10 नवंबर दिन बुधवार को है।
छठ पूजा 2021 कैलेंडर
08 नवंबर: दिन- सोमवार: नहाय खाय से छठ पूजा का प्रारंभ।
09 नवंबर: दिन – मंगलवार: खरना।
10 नंवबर: दिन – बुधवार – छठ पूजा, डूबते सूर्य को अर्घ्य।
11 नवंबररू दिनरू गुरुवाररू उगते हुए सूर्य को अर्घ्य, छठ पूजा समापन।
नहाय खाय: छठ पूजा का प्रारंभ नहाय खाय से होता है। इस वर्ष नहाय खाय 08 नवंबर को होगा।
खरना: छठ पूजा का दूसरा दिन खरना होता है, जो इस वर्ष 09 नवंबर को है। खरना को लोहंडा भी कहा जाता है। खरना छठ पूजा का महत्वपूर्ण दिन होता है। खरना वाले दिन व्रत रखा जाता और रात में खीर खाकर फिर 36 घंटे का कठिन व्रत रखा जाता है। खरना के दिन छठ पूजा का प्रसाद बनाया जाता है।
छठ पूजा: खरना के अगले दिन छठी मैया और सूर्य देव की पूजा होती है। इस साल छठ पूजा 10 नवंबर को है। छठ पूजा के दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
छठ पूजा समापन: छठ पूजा का समापन अगले दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ हो जाता है। 36 घंटे का कठिन व्रत पारण के बाद पूर्ण किया जाता है।

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