मुख्यमंत्री योगी ने किया नई जनसंख्या नीति का ऐलान, जानिए कैसी होगी नई जनसंख्या नीति…

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समाचार सच, लखनऊ (एजेन्सी)। विश्व जनसंख्या दिवस पर रविवार को उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नई जनसंख्या नीति का ऐलान कर दिया। सूबे के स्वास्थ्य मंत्री जेपी सिंह ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण जरूरी है। माना जाता है कि हमारी (भारत) की आबादी 2027 तक चीन की जनसंख्या से आगे निकल जाएगी। अगर हम नई जनसंख्या नीति लागू करते हैं, तब इसके हिसाब से हमारे सूबे की आबादी 2052 तक स्थिर रहेगी।

इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश की बढ़ती जनसंख्या विकास की राह में सबसे बड़ी बाधा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार जो नई जनसंख्या नीति लेकर आई है उससे समाज के हर वर्ग व तबके को जुड़ना होगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए जागरूकता जरूरी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो जनसंख्या नीति सरकार लेकर आई है उससे समाज में खुशहाली आएगी। उनका कहना था कि जनसंख्या नियंत्रण पर पिछले चार दशकों से चर्चा हो रही थी. देश की गरीबी का एक मुख्य कारण जनसंख्या भी है। उन्होंने कहा कि जो भी जनसंख्या नीति सरकार लेकर आई है उसमें सभी वर्गों का ध्यान रखा गया है. साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि दो बच्चों के बीच अंतर बहुत जरूरी है. उन्होंने कहा कि दो बच्चों के जन्म में अंर्त न होने की वजह से कुपोषण का खतरा भी बना रहता है.

आपकों बता दें कि योगी सरकार ने नई जनसंख्या नीति का जो मसौदा तैयार किया है अगर यह अधिनियमित हो जाता है तो यह प्रस्तावित कानून गजट प्रकाशित होने के एक साल बाद लागू हो जाएगा। यानी 2022 से प्रदेश में 2030 तक के लिए नई जनसंख्या नीति लागू रहेगी। सरकार द्वारा तैयार मसौदे में जनसंख्या नियंत्रण में मदद करने वालों को प्रोत्साहन देने का प्रावधान तो है ही, साथ ही इसे न मानने वालों के लिए कई सुविधाओं से वंचित करने का भी प्रावधान है।

नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी, स्थानीय चुनाव भी नहीं लड़ सकेंगे
राज्य विधि आयोग द्वारा तैयार नई जनसंख्या नीति के मुताबिक प्रदेश में जिन लोगों को दो से अधिक बच्चे होंगे वे सरकारी नौकरी के लिए अपात्र माने जाएंगे। साथ ही ऐसे लोगों को न तो पदोन्नति मिलेगी और न ही किसी तरह की सब्सिडी। इतना ही नहीं ऐसे लोग स्थानीय चुनाव भी नहीं लड़ पाएंगे। मसौदे के मुताबिक दो से अधिक बच्चे वाले अभिभावक 77 तरह की सरकारी योजनाओं व अनुदान का लाभ नहीं ले सकेंगे। इस विधेयक के प्रभाव में आने के एक साल के भीतर सभी सरकारी कर्मियों व स्थानीय निकाय में चुने गए जनप्रतिनिधियों एक शपथ पत्र देना होगा। शपथ पत्र के बाद भी अगर वे तीसरी संतान पैदा करते हैं तो प्रतिनिधि का निर्वाचन रद्द करने का प्रस्ताव भी मसौदे में है। सरकारी कर्मचारियों के लिए प्रमोशन रद्द करने और सेवा समेत करने तक का प्रस्ताव दिया गया है।

दो बच्चों वाले सरकारी कर्मियों को मिलेगा यह लाभ
नई जनसंख्या नीति के मसौदे के मुताबिक उत्तर प्रदेश सरकार के उन कर्मचारियों को प्रमोशन, वेतन वृद्धि, आवास योजनाओं में रियायतें और अन्य भत्ते देगी जो जनसंख्या नियंत्रण मानदंडों का पालन करेंगे या जिनके दो या उससे कम बच्चे हैं. दो संतानों के मानदंड को अपनाने वाले सरकारी कर्मचारियों को पूरी सेवा के दौरान दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि, पूरे वेतन और भत्तों के साथ 12 महीने का मातृत्व या पितृत्व अवकाश और राष्ट्रीय पेंशन योजना के तहत नियोक्ता अंशदान कोष में तीन प्रतिशत की वृद्धि मिलेगी।

प्राइवेट क्षेत्र वालों को मिलेगा ये लाभ
दो बच्चे पैदा करने वाले वैसे लोग जो सरकारी नौकरी में नहीं हैं, उन्हें भी पानी, बिजली, हाउस टैक्स, होम लोन में छूट व अन्य सुविधाएं देने का प्रस्ताव है। सभी माध्यमिक स्कूलों में जनसंख्या नियंत्रण से जुड़े विषय को पढ़ाने का भी प्रस्ताव है।

परिवार नियोजन के लिए होगी ये व्यवस्था
बताया जा रहा है कि साल 2021-30 की अवधि के लिए प्रस्तावित नीति के माध्यम से परिवार नियोजन कार्यक्रम के अंतर्गत जारी गर्भ निरोधक उपायों की सुलभता को बढ़ाया जाना और सुरक्षित गर्भपात की समुचित व्यवस्था देने की कोशिश होगी। यह नीति अमल में आने के बाद स्वास्थ्य सुविधाओं के माध्यम से नवजात मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर को कम करने का प्रयास होगा। साथ ही नपुंसकता-बांझपन की समस्या के समाधान उपलब्ध कराते हुए जनसंख्या रोकने के प्रयास भी किए जाएंगे। नई नीति में 11 से 19 साल के किशोरों के पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य के बेहतर प्रबंधन करने पर जोर होगा। बुजुर्गों की देखभाल के लिए व्यापक व्यवस्था करना भी अहम मुद्दा है। 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नवीन जनसंख्या नीति 2021-30 जारी करेंगे।

मसौदे में ये भी व्यवस्था
डिजिटल हेल्थ मिशन के तहत नवजातों, किशोरों और वृद्धजनों की डिजिटल ट्रैकिंग की व्यवस्था की जाएगी। नई नीति में 11 से 19 वर्ष के किशोरों के पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य के बेहतर प्रबंधन के अलावा, बुजुर्गों की देखभाल को अहमियत। गर्भ निरोधक उपायों की सुलभता को बढ़ाया जाना और सुरक्षित गर्भपात की समुचित व्यवस्था देने की कोशिश होगी। इससे पहले अपर मुख्य सचिव चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि जनसंख्या नीति प्रदेश में एनएफएचएस-04 (नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे) सहित अनेक रिपोर्ट के अध्ययन के बाद तैयार की जा रही है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-05 की रिपोर्ट जल्द ही जारी होने वाली है। नई नीति जनसंख्या स्थिरीकरण के प्रयासों को तेज करने वाली होगी. इसमें 2026 और 2030 तक के लिए दो चरणों में अलग-अलग मानकों पर केंद्रित लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।

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