-प्रांतीय व्यापारी सम्मेलन में व्यापारियों के हितों पर मंथन, आपदा में मुआवजा, कैंची धाम बाईपास और स्थानीय स्तर पर समस्याओं के समाधान की उठी मांग
-सीएम बोले-व्यापारी प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़, सुरक्षा, सम्मान और हितों की रक्षा के लिए सरकार प्रतिबद्ध

समाचार सच, हल्द्वानी। रिपोर्ट- अजय सिंह चौहान
उत्तराखंड में व्यापारियों की समस्याओं के समाधान, कारोबार को सरल बनाने और व्यापारिक समुदाय को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के मुद्दे शुक्रवार को हल्द्वानी में आयोजित प्रांतीय व्यापारी सम्मेलन में प्रमुखता से उठे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जहां व्यापारियों के हितों से जुड़ी आठ महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं, वहीं प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रदेश अध्यक्ष नवीन वर्मा ने व्यापारियों की विभिन्न समस्याओं और लंबित मांगों को मुख्यमंत्री के सामने विस्तार से रखा।
सम्मेलन में आपदा प्रभावित व्यापारियों को मुआवजा, जीएसटी अधिकारियों द्वारा कथित उत्पीड़न पर रोक, मंडी शुल्क में राहत, जिला स्तर पर व्यापार मित्र व्यवस्था, कैंची धाम बाईपास का निर्माण और हल्द्वानी के ग्रामीण क्षेत्रों में व्यावसायिक कर का मुद्दा प्रमुखता से उठा। नवीन वर्मा ने कहा कि प्रदेशभर के व्यापारियों को मुख्यमंत्री से काफी उम्मीदें हैं और सरकार को उनकी समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

व्यापारियों की सुरक्षा, सम्मान और हितों की रक्षा सरकार की प्राथमिकताः धामी
हल्द्वानी में आयोजित उत्तराखंड प्रांतीय व्यापारी सम्मेलन का मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। प्रदेशभर से पहुंचे व्यापारियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यापारी किसी भी राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ होते हैं। वे केवल वस्तुओं के क्रय-विक्रय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रोजगार सृजन, स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने और प्रदेश की आर्थिक शक्ति को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़े उद्योगों से लेकर छोटे दुकानदारों तक प्रत्येक व्यापारी उत्तराखंड की आर्थिक प्रगति में योगदान दे रहा है। कोविड-19 जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी व्यापारियों ने आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित कर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार व्यापारियों को केवल करदाता नहीं, बल्कि विकास का भागीदार मानती है।
उन्होंने कहा कि व्यापारियों के लिए भयमुक्त, सुरक्षित और पारदर्शी वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने और व्यापारियों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।

नवीन वर्मा ने किया व्यापारियों की ओर से मुख्यमंत्री का अभिनंदन
प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रदेश अध्यक्ष नवीन वर्मा ने मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए प्रदेशभर के व्यापारियों की ओर से उनका अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि संगठन से जुड़ी नगर एवं अन्य इकाइयों के प्रतिनिधियों के साथ सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों से लेकर नेपाल और तिब्बत की सीमाओं से लगे इलाकों तथा तराई क्षेत्र के व्यापारी और उद्योगपति सम्मेलन में शामिल हुए हैं।
नवीन वर्मा ने कहा कि संगठन लंबे समय से व्यापारियों के हितों के लिए संघर्ष करता आया है और सामाजिक दायित्वों के निर्वहन में भी हमेशा आगे रहा है। उन्होंने वर्ष 2013 की आपदा और कोरोना महामारी का उल्लेख करते हुए कहा कि संकट की घड़ी में व्यापारी समाज ने जरूरतमंदों की मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने बताया कि हरिद्वार के व्यापारियों ने कोरोना काल में लगातार कई महीनों तक भंडारे चलाकर लोगों को भोजन उपलब्ध कराया, जबकि हल्द्वानी के दवा विक्रेताओं ने जरूरतमंदों तक घर-घर दवाएं पहुंचाईं। उन्होंने कहा कि व्यापारी समाज केवल आर्थिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सेवा में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।
हिमालय संरक्षण के लिए व्यापार मंडल के प्रयासों को किया याद
नवीन वर्मा ने व्यापार मंडल की ओर से चलाए गए हिमालय संरक्षण अभियान का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 में कुमाऊं क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए व्यापक अभियान चलाया गया। इस दौरान हल्द्वानी से अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, धारचूला, डीडीहाट, बागेश्वर, ग्वालदम और कर्णप्रयाग होते हुए गैरसैंण तक जनजागरण किया गया।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 में गढ़वाल क्षेत्र में भी इस अभियान को आगे बढ़ाया गया और विभिन्न क्षेत्रों में हिमालय तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी सरकार के मार्गदर्शन में ऐसे अभियान चलाकर पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनभागीदारी बढ़ाई जाएगी।
जीएसटी के नाम पर व्यापारियों का उत्पीड़न रोकने की मांग
नवीन वर्मा ने मुख्यमंत्री के सामने व्यापारियों की प्रमुख समस्याएं रखते हुए कहा कि व्यापारी सरकार के राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ऐसे में कर संग्रह करने वाले अधिकारियों को व्यापारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए और अनावश्यक दबाव बनाने से बचना चाहिए।
उन्होंने जीएसटी विभाग की कार्रवाई के दौरान कुछ व्यापारियों को कथित रूप से डराने-धमकाने और परेशान करने की शिकायतों का उल्लेख करते हुए ऐसी कार्यप्रणाली पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि कर व्यवस्था पारदर्शी होनी चाहिए और नियमों के पालन के नाम पर किसी भी व्यापारी का अनावश्यक उत्पीड़न नहीं होना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि व्यापारियों की समस्याओं का समाधान ऐसा होना चाहिए, जिससे सरकार का राजस्व भी सुरक्षित रहे और कारोबारियों को अनावश्यक परेशानी का सामना भी न करना पड़े।
आपदा में व्यापारियों को भी मिले मुआवजा
प्रदेश अध्यक्ष नवीन वर्मा ने मांग उठाई कि प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित व्यापारियों को भी राहत और मुआवजे का पात्र माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आपदा के कारण दुकानों, प्रतिष्ठानों और कारोबार को नुकसान पहुंचने पर व्यापारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है। ऐसे में प्रभावित व्यापारियों को नियमानुसार राहत उपलब्ध कराने की प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने भी सम्मेलन में प्राकृतिक अथवा अन्य आपदाओं से प्रभावित व्यापारियों को नियमानुसार उचित राहत दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई किए जाने की घोषणा की।
मंडी शुल्क में राहत और व्यापार मित्र व्यवस्था की मांग
नवीन वर्मा ने मंडी शुल्क को उत्तर प्रदेश की तर्ज पर करने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इससे प्रदेश के व्यापारियों, उद्योगपतियों और किसानों को लाभ मिल सकता है। उन्होंने सरकार से इस विषय पर सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की।
उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी व्यापारिक समस्याओं के समाधान के लिए व्यापारियों को बार-बार देहरादून जाना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है। ऐसी समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए जिला स्तर पर व्यापार मित्र व्यवस्था गठित की जानी चाहिए, ताकि व्यापारियों को स्थानीय स्तर पर ही राहत मिल सके।
इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने राज्य और जिला स्तर पर उद्योग मित्र समितियों के पुनर्गठन तथा उनकी नियमित बैठकें आयोजित करने की घोषणा की। इससे व्यापारियों और प्रशासन के बीच संवाद को मजबूत करने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है।
कैंची धाम बाईपास और हल्द्वानी में व्यावसायिक कर का मुद्दा उठा
सम्मेलन में नवीन वर्मा ने कैंची धाम क्षेत्र में लगने वाले जाम का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पिथौरागढ़, बागेश्वर, अल्मोड़ा और चमोली सहित पर्वतीय जिलों के व्यापारियों तथा पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों को यातायात की समस्या के कारण परेशानी उठानी पड़ती है। इसका असर इन क्षेत्रों की पर्यटन गतिविधियों पर भी पड़ता है। उन्होंने कैंची धाम बाईपास का निर्माण जल्द पूरा कराने की मांग की।
उन्होंने हल्द्वानी के ग्रामीण क्षेत्रों को नगर निगम में शामिल किए जाने के बाद व्यावसायिक कर वसूले जाने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि संबंधित क्षेत्रों के विकास को लेकर पूर्व में किए गए आश्वासनों के अनुरूप ही कर व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने इन क्षेत्रों के व्यापारियों से वसूले जा रहे व्यावसायिक कर को वापस लेने की मांग की।
इसके अलावा हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर निर्माण से जुड़े विषयों पर भी व्यापारी प्रतिनिधियों की राय और सुझाव लेने की आवश्यकता बताई, ताकि विकास योजनाओं के साथ व्यापारियों के हितों का भी ध्यान रखा जा सके।
सीएम धामी ने कीं व्यापारियों के हित में आठ महत्वपूर्ण घोषणाएं
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सम्मेलन में व्यापारियों की समस्याओं और हितों को ध्यान में रखते हुए आठ प्रमुख घोषणाएं कीं।
-प्राकृतिक आपदा अथवा अन्य आपदाओं से प्रभावित व्यापारियों को नियमानुसार उचित राहत दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
-व्यापारियों की समस्याओं के समाधान के लिए राज्य और जिला स्तर पर उद्योग मित्र समितियों का पुनर्गठन कर नियमित बैठकें आयोजित की जाएंगी।
-जीएसटी में पंजीकृत व्यापारियों के दुर्घटना बीमा की जानकारी का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
-पर्यटन व्यवसाय के पंजीकरण की प्रक्रिया सरल बनाई जाएगी और सिंगल विंडो व्यवस्था लागू की जाएगी।
-पर्यटन बहुल क्षेत्रों और जिला मुख्यालयों में होम स्टे सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।
-चारधाम यात्रा मार्ग पर आवश्यक स्थानों पर पार्किंग विकसित की जाएगी।
-राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य मार्गों और अन्य प्रमुख मार्गों से जुड़े बाजारों में सड़कों तथा नालियों के निर्माण और मरम्मत को प्राथमिकता दी जाएगी।
-व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में कार्यरत श्रम विभाग में पंजीकृत श्रमिकों को कर्मकार कल्याण बोर्ड की योजनाओं एवं सुविधाओं का लाभ दिलाया जाएगा।
26 विभागों की 206 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में निवेश और व्यापार से संबंधित प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम को मजबूत किया गया है। इसके अंतर्गत 26 प्रमुख विभागों की 206 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं। निवेशकों की समस्याओं के समाधान के लिए ‘निवेश मित्र’ व्यवस्था तथा उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए उत्तराखंड स्टार्टअप नीति और 200 करोड़ रुपये के वेंचर फंड का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास को पर्वतीय क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए चमोली, पौड़ी और अल्मोड़ा में छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विशेष औद्योगिक पार्क के लिए भूमि चिह्नित की गई है। सरकार का लक्ष्य स्थानीय युवाओं को अपने क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि पलायन को कम किया जा सके।
स्मारिका का विमोचन, व्यापार मंडल के प्रतिनिधि सम्मानित
सम्मेलन के दौरान प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल की स्मारिका का विमोचन किया गया और विभिन्न इकाइयों के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने व्यापारियों से प्रदेश के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान करते हुए कहा कि स्थानीय व्यापार, पर्यटन, लघु उद्योग और स्वरोजगार उत्तराखंड को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के महत्वपूर्ण आधार हैं।
उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार और व्यापारी समाज के संयुक्त प्रयासों से उत्तराखंड को विकसित एवं आत्मनिर्भर राज्य बनाने का लक्ष्य पूरा किया जा सकेगा।
सम्मेलन में ये रहे मौजूद
इस अवसर पर सांसद अजय भट्ट, कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, विधायक बंशीधर भगत, विधायक सरिता आर्या, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष कुंदन सिंह परिहार, तरुण बंसल, प्रां0उ.व्या0मं0 के संरक्षक अनिल गोयल, कार्यकारी अध्यक्ष प्रमोद गोयल, प्रदेश महामंत्री प्रकाश मिश्रा, प्रदेश कोषाध्यक्ष राजेश अग्रवाल, प्रदेश संगठन मंत्री मदन फर्त्याल, प्रदेश मंत्री शांति जीना, जिला संरक्षक इंद्र कुमार भुटियानी, जिलाध्यक्ष विपिन गुप्ता, जिला महामंत्री हर्षवर्द्धन पाण्डे, जिलाध्यक्ष कुसुम दिगारी, सचिव बिट्टू पालीवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, दर्जा राज्यमंत्री डॉ. अनिल कपूर डब्बू, मोहन पाठक, अरूणा टंडन, उर्वशी बोरा, विनीता शर्मा, पवन वर्मा, शिव कपूर, भाष्कर त्रिपाठी, कौशलेन्द्र भट्ट, जनकराज उत्पल, धर्मेंद्र नेगी सहित 393 नगर इकाईयों के पदाधिकारीगण लोग मौजूद रहे।

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