समाचार सच, हल्द्वानी। रिपोर्ट- अजय सिंह चौहान
उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस की SIR समिति के अध्यक्ष एवं केदारनाथ के पूर्व विधायक मनोज रावत ने आरोप लगाया कि SIR की अलग-अलग प्रक्रियाओं का इस्तेमाल एक खास विचारधारा से जुड़े मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए किया जा रहा है।
मनोज रावत ने कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के साथ कुमाऊं कमिश्नर को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी नैनीताल को सौंपा। उन्होंने दावा किया कि नैनीताल और ऊधमसिंह नगर जिलों की कई विधानसभा सीटों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। कांग्रेस का आरोप है कि कई मामलों में एक ही आपत्तिकर्ता ने हजारों मतदाताओं के नामों पर आपत्तियां लगाई हैं।
रावत ने कहा कि कांग्रेस ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की है कि गलत, अधूरी अथवा नियमों के अनुरूप नहीं होने वाली आपत्तियों को नियमानुसार प्रारंभिक स्तर पर ही निरस्त किया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में अधिकारियों पर सत्ता पक्ष का दबाव है और नियमों की अनदेखी की जा रही है। इसके चलते बड़ी संख्या में मतदाताओं को नोटिस और सुनवाई की प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है।
फॉर्म-7 के बाद DSE-PSE को लेकर उठाए सवाल
मनोज रावत ने आरोप लगाया कि प्रदेश की अलग-अलग विधानसभा सीटों में करीब 1.07 लाख मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के माध्यम से आवेदन किए गए हैं। उनका कहना है कि इन आपत्तियों में गरीब, किसान, कम पढ़े-लिखे, पिछड़े वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से जुड़े मतदाता भी शामिल हैं।
उन्होंने अब Demographic Similar Entries (DSE) और Photographic Similar Entries (PSE) की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। रावत का दावा है कि इस प्रक्रिया के तहत प्रदेश में करीब ढाई लाख से अधिक मतदाताओं को एक से अधिक स्थानों पर नाम दर्ज होने के आधार पर नोटिस मिल सकते हैं।
कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि यदि प्री-SIR प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर से संभावित दोहरे मतदाताओं की पहचान की जा चुकी थी, तो दोबारा इसी तरह की कवायद की आवश्यकता क्यों पड़ रही है।
कांग्रेस ने मतदाता सूची के आंकड़ों पर भी उठाए सवाल
रावत ने दावा किया कि SIR शुरू होने से पहले ही समरी रिवीजन के दौरान करीब पांच लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए थे। उनके मुताबिक करीब 79 लाख मतदाताओं के साथ SIR की प्रक्रिया शुरू हुई थी, जबकि प्री-SIR चरण में भी लगभग आठ लाख नाम कम हुए।
उन्होंने कहा कि ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 71 लाख मतदाता दर्ज हैं और इनमें से लगभग 25 लाख मतदाताओं को विसंगतियों अथवा मैपिंग से संबंधित कारणों के चलते नोटिस जारी किए गए हैं। रावत ने दावा किया कि इस तरह प्रदेश के लगभग हर तीसरे मतदाता को नोटिस की स्थिति का सामना करना पड़ा है।
उन्होंने कहा कि इन नोटिसों की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही फॉर्म-7 के माध्यम से नए नाम हटाने के आवेदन सामने आ गए हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि कई विधानसभा क्षेत्रों में हजारों नामों पर एक साथ आपत्तियां लगाई गई हैं, जिनका निस्तारण निर्धारित नियमों के अनुसार नहीं किया जा रहा है।
युवा मतदाताओं को लेकर भी कांग्रेस ने जताई चिंता
मनोज रावत ने आरोप लगाया कि DSE और PSE के नाम पर अब नए और युवा मतदाताओं के नाम भी प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता मतदाता सूची में पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने और किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम गलत तरीके से हटने से रोकने के लिए सक्रिय रहेंगे।
रावत ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि या तो आयोग की व्यवस्था में गंभीर खामी है या फिर उसकी मंशा पर सवाल उठने की स्थिति पैदा हो रही है। हालांकि, ये सभी आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं।
ज्ञापन सौंपने के दौरान हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश, जिला अध्यक्ष राहुल छिमवाल, महानगर अध्यक्ष गोविंद सिंह बिष्ट, बीएलए-1 हल्द्वानी डॉ. मयंक भट्ट, मधु सांगूड़ी, भागीरथी बिष्ट, शोभा बिष्ट, नीमा भट्ट, डॉ. केदार पलड़िया, गुरप्रीत प्रिंस, नंदन दुर्गापाल, राजेंद्र दुर्गापाल, जाकिर हुसैन, गिरीश पांडे, मोहम्मद गुफरान, संदीप पांडे, प्रदीप बिष्ट, नितिन भट्ट, संजू उप्रेती, प्रदीप नेगी, सतीश नैनवाल, संजय किरौला, कानू बिष्ट सहित कई कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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