दर्श अमावस्या 2024: इस दिन धरती पर फिर आएंगे पितर, जरूर करें ये काम, प्रसन्न होकर भर देंगे घर

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समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का बड़ा महत्व है। अमावस्या पर बहुत से लोग पितरों के निमित्त भी पूजा करते हैं। शास्त्रों में दर्श अमावस्या का प्रभाव पितृ अमावस्या की तरह ही माना गया है। मान्यता है कि दर्श अमावस्या पर पूर्वज स्वर्ग से धरती पर आते हैं और अपने परिजनों को आशीर्वाद देते हैं, इसलिए इस दिन पूर्वजों के निमित्त पूजा का विधान है। दर्श अमावस्या को पितृ दोष से छुटकारा पाने के लिए भी उपाय किए जाते हैं. ऐसे ही कुछ उपाय उज्जैन के पंडित आनंद भारद्वाज ने भी बताए…

दर्श अमावस्या का धार्मिक महत्व
यूं तो हर माह में एक अमावस्या आती है, लेकिन दर्श अमावस्या का महत्व अधिक होता है। क्योंकि, यह दिन पितरों को याद करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए समर्पित होता है। इन उपायों को करने से न केवल पितृ प्रसन्न होते हैं, बल्कि जीवन में भी सुख-समृद्धि आती है. जीवन में कष्टों से छुटकारा मिलता है। माना जाता है कि दर्श अमावस्या के दिन विधि विधान से पूजा करने से पितरों के लिए मोक्ष प्राप्ति का मार्ग आसान हो जाता है।

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इन कार्यों से पितृ होंगे प्रसन्न

  1. मान्यता के अनुसार, दर्श अमावस्या के दिन कौओं को भोजन खिलाने से पितृ प्रसन्न होते हैं और खूब आशीर्वाद देते हैं।
  2. इस दिन धार्मिक स्थलों पर जाकर पूजा-अर्चना करने से पितृ प्रसन्न होते हैं. साथ ही पूजन के बाद गौ माता की सेवा जरूर करना चाहिए. इससे देवी-देवताओं के साथ पितृ देव भी प्रसन्न होते हैं। दर्श अमावस्या के दिन गाय को चारा खिलाना शुभ होता है।
  3. दर्श अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त तर्पण व पिंडदान करने से वे प्रसन्न होते हैं। इस दिन दान का भी महत्व है. दान करने से पुण्य मिलता है। पितरों को शांति मिलती है।
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भूल से भी न करें ये कार्य
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अमावस्या के दिन भूलकर भी किसी व्यक्ति को बाल और नाखून नहीं काटना चाहिए। ऐसा करने से आपके पितृ नाराज हो सकते हैं और आपको पितृ दोष लग सकता है। इसके अलावा अमावस्या के दिन बाल धोना भी वर्जित माना गया है। मान्यता है कि इस दिन बाल धोने से मनुष्य को कई तरह की परेशानियां झेलनी पड़ सकती हैं।

कब मनाई जाएगी दर्श अमावस्या
वैदिक पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष महीने की दर्श अमावस्या तिथि की शुरुआत 30 नवंबर को सुबह 10 बजकर 29 मिनट से होगी। जबकि, अमावस्या तिथि की समाप्ति 1 दिसंबर को सुबह 11 बजकर 50 मिनट पर होगी। ंऐसे में उदया तिथि की मुताबिक दर्श अमावस्या 1 दिसंबर रविवार को ही मनाई जाएगी।

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