समाचार सच, देहरादून। ऋषिगंगा की जल प्रलय के बाद से ही प्रभावित क्षेत्र में राहत-बचाव कार्य जारी है। 14 दिन से मलबे में शवों की ढूंढखोज की जा रही है। तपोवन सुरंग में लगातार पानी का रिसाव होने से मलबा हटाने का कार्य प्रभावित हो रहा है। पानी के रिसाव के लिए दो पंप मशीनें लगाई गई हैं। अब तक कुल 67 शव मिल चुके हैं। वहीं, आपदा में 137 लोग अभी भी लापता हैं। स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स ने चमोली जिले के ऊपरी इलाके में बनी झील के पास संचार सुविधा के लिए क्विक डिप्लोमेबल एंटेना (क्यूडीए) सिस्टम लगाया है। तपोवन में मिले पांच शवो में से चार शवो की शिनाख्त हो गई है। जिसमे अमृत कुमार पुत्र कैलाश निवासी झारखंड, जीवन सिंह पुत्र जवाहर सिंह पंजिया निवासी कालसी देहरादून, ज्योतिष बाकला पुत्र मनोज निवासी झारखंड, मुन्ना कुमार पुत्र विदेश्वरी सिंह निवासी बिहार, जलाल पुत्र इत्यार्क अली निवासी लखीमपुर खीरी उत्तर प्रदेश के रूप में हुई है। ऋषि गंगा की आपदा के दो सप्ताह बाद भी कई लापता लोगों के परिजन तपोवन में डटे हैं। तपोवन के बैराज साइट से लापता चल रहे इंजीनियर मनीष कुमार का अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है। मनीष के ससुर अरविंद कुमार का कहना है कि उनका दामाद तपोवन में ओम मेटल कंपनी में इंजीनियर के पद पर कार्यरत था और पटना के नवदपुर का रहने वाला था। उन्होंने बताया कि मनीष की बीते वर्ष आठ दिसंबर को ही शादी हुई थी और आपदा के बाद से लापता है। अरविंद का कहना है कि बैराज में मलबा हटाने का काम धीमी गति से चल रहा है, जिससे अभी तक मनीष का कोई पता नहीं चल पाया है। मनीष की खोज में उनके साडू भाई अंकित शर्मा भी तपोवन में डटे हुए हैं। अब तक कुल 67 शव मिल चुके हैं। वहीं, आपदा में 137 लोग अभी भी लापता हैं। तपोवन सुरंग में लगातार पानी का रिसाव होने से मलबा हटाने का कार्य प्रभावित हो रहा है। पानी के रिसाव के लिए दो पंप मशीनें लगाई गई हैं।
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