कोरोना के आड़ में मजदूर विरोधी निर्णय ले रही मोदी सरकार : पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा
समाचार सच, देहरादून। केंद्र व राज्य सरकारों की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ देशव्यापी विरोध दिवस के तहत सीटू, एटक, इंटक, रक्षा, बैंक, बीमा, बिजली से जुड़ी यूनियन्स, फैडरेशनों ने यहां जिला मुख्यालय में प्रदर्शन किया। इस दौरान इंटक के प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट ने कहा कि केंद्र कि मोदी सरकार कोरोना से लड़ने में असफल हुई है और कोरोना की आड़ में मजदूर विरोधी निर्णय ले रही है। कहा कि मोदी सरकार रक्षा संस्थानों का निजीकरण करने के लिए उनका निगमीकरण कर रही है। साथ ही कोल इण्डिया का निजीकरण कर बड़े पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। कहा कि यह सरकार बैंक, बीमा, रेल, बिजली सेक्टर को बेच रही है। जिसका पूरे देश में ट्रेड यूनियनें व्यापक विरोध कर रही हैं। कहा कि देश की इन सम्पत्तियों को बेचने नहीं दिया जाएगा। इस अवसर सीटू के प्रांतीय सचिव लेखराज ने कहा कि केंद्र कि भाजपा नीत मोदी सरकार प्रवासी मजदूरों को काम देने में फेल साबित हुई है। कोरोना काल में मजदूर जिल्लत की जिंदगी जीने पर मजबूर हुआ है। भाजपा शासित राज्यों ने श्रम कानूनों को लगभग समाप्त कर दिया है, जिससे मजदूरों को गुलाम बनाने की ओर धकेला जा रहा है। कहा कि उत्तराखंड सरकार ने भी मजदूरों के हितों में बने कानून स्टैंडिंग मॉडल ऑडर के प्रावधानों को समाप्त कर उद्योगों के मालिकों को मजदूरों को लूटने की खुली छूट दे दी है। एटक के प्रांतीय महामंत्री अशोक शर्मा ने कहा कि त्रिवेंद्र रावत सरकार द्वारा कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काटना कोरोना की आड़ में कर्मचारियों का शोषण करना है। उन्होंने सरकार द्वारा आशा वर्करों को कोरोना में कार्य करने का कम से कम दस हजार इंसेंटिव प्रति माह दिया जाये व चम्पावत में निकली गयी आशाओं को वापस रखने के साथ ही चाय बागान में वर्करों के हो रहे उत्पीड़न को रोकने व सेवानिवृत्ति पर उचित मुआवजा व जिस भूमि पर पीढ़ियों से निवास करने वालों को मालिकाना हक देने की मांग की।
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