रामगढ़ की भारती जीना ने पारंपरिक हुनर को स्वरोजगार से जोड़ा, पीरूल से हस्तशिल्प उत्पाद बनाकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ जंगलों की सुरक्षा में भी दे रहीं योगदान
समाचार सच, रामगढ़। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने और पहाड़ के स्थानीय संसाधनों को रोजगार का माध्यम बनाने पर जोर दे रही है। इसी सोच को धरातल पर उतारने वाली रामगढ़ के घ्वेती गांव की भारती जीना की पहल अब महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बन रही है।
भारती जीना ने अपने पारंपरिक हुनर को रोजगार का माध्यम बनाते हुए गांव की 40 से 45 महिलाओं को पीरूल से हस्तशिल्प उत्पाद तैयार करने के काम से जोड़ा है। महिलाएं पीरूल से टोकरी सहित विभिन्न उपयोगी उत्पाद तैयार कर अपनी आजीविका को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
दादा से सीखा हुनर, महिलाओं तक पहुंचाया
भारती जीना ने पीरूल से टोकरी बनाने का हुनर अपने दादा से सीखा था। उन्होंने इस पारंपरिक कला को सिर्फ अपने तक सीमित रखने के बजाय इसे गांव की अन्य महिलाओं तक पहुंचाने का फैसला किया।
उन्होंने महिलाओं को पीरूल से हस्तशिल्प उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण दिया। इसके बाद कई महिलाएं इस काम से जुड़कर अपने स्तर पर उत्पाद तैयार करने लगीं।
इस पहल ने पहाड़ की महिलाओं के लिए घर और गांव के आसपास रहकर आय अर्जित करने का एक नया रास्ता तैयार किया है।
पीरूल से रोजगार के साथ जंगलों की सुरक्षा
भारती जीना की पहल की खासियत यह है कि इसमें रोजगार के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी जोड़ा गया है।
महिलाएं जंगलों से सूखा पीरूल एकत्र कर उसे सुरक्षित स्थान पर रखती हैं। इसके बाद इसी पीरूल का इस्तेमाल हस्तशिल्प उत्पाद बनाने में किया जाता है।
वन क्षेत्रों से सूखा पीरूल हटाने से वनाग्नि के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। इस तरह एक ओर महिलाओं को रोजगार मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर जंगलों की सुरक्षा की दिशा में भी योगदान दिया जा रहा है।
धामी सरकार के आत्मनिर्भर उत्तराखंड अभियान की जमीनी मिसाल
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार उत्तराखंड की महिलाओं और युवाओं को स्थानीय संसाधनों के माध्यम से स्वरोजगार से जोड़ने पर जोर देते रहे हैं। घ्वेती गांव में भारती जीना की पहल इसी सोच की एक जमीनी तस्वीर सामने रखती है।
पीरूल जैसे स्थानीय संसाधन को बेकार समझने के बजाय उसे उत्पाद और रोजगार में बदलना पहाड़ के गांवों में स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।
कर्तव्य फाउंडेशन से जुड़ने के बाद बढ़ी उम्मीद
हाल ही में भारती जीना कर्तव्य फाउंडेशन से भी जुड़ी हैं। इससे उनके काम को और विस्तार मिलने तथा अधिक महिलाओं को इस पहल से जोड़ने की संभावनाएं बढ़ी हैं। उनके प्रयासों की नैनीताल जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल द्वारा भी सराहना की गई है।
मुख्यमंत्री धामी के आत्मनिर्भर उत्तराखंड के संकल्प के अनुरूप भारती जीना की यह पहल यह संदेश देती है कि पहाड़ के स्थानीय संसाधन, पारंपरिक हुनर और महिलाओं की मेहनत को सही दिशा मिले तो गांव में ही रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। पीरूल से तैयार हो रहे हस्तशिल्प उत्पाद अब सिर्फ जंगलों की सूखी पत्तियां नहीं, बल्कि पहाड़ की महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की नई उम्मीद बन रहे हैं।

सबसे पहले ख़बरें पाने के लिए -
👉 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें
👉 फेसबुक पर जुड़ने हेतु पेज़ लाइक करें
👉 यूट्यूब चैनल सबस्क्राइब करें
हमसे संपर्क करने/विज्ञापन देने हेतु संपर्क करें - +91 70170 85440



