समाचार सच, रायपुर (देहरादून) डेस्क। उत्तराखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस दाखिलों के दौरान आरक्षण का लाभ लेने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज इस्तेमाल किए जाने का मामला सामने आया है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे में प्रवेश के लिए कथित रूप से गलत प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने के मामले में चार छात्राओं समेत पांच लोगों के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। राजस्व विभाग की शिकायत पर रायपुर और क्लेमनटाउन थानों में अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
नीट-यूजी काउंसिलिंग के बाद स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे की नौ सीटें आवंटित की गई थीं। इनमें पांच अभ्यर्थियों ने मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लिया। दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान कुछ प्रमाणपत्रों की वैधता को लेकर संदेह सामने आया। इसके बाद जिलाधिकारी कार्यालय के निर्देश पर संबंधित दस्तावेजों की जांच कराई गई। जांच में कुछ प्रमाणपत्र सही नहीं पाए गए, जिसके बाद उन्हें निरस्त कर दिया गया। साथ ही कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हुए चार दाखिले भी रद्द कर दिए गए।
रायपुर थाने में कंडोली की पटवारी जगदीश कुमार की शिकायत पर खुशी, परी और स्वाति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि तीनों अभ्यर्थियों ने आरक्षित कोटे का लाभ लेने के लिए आवेदन के साथ कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज और आधार कार्ड प्रस्तुत किए।
वहीं, क्लेमनटाउन थाने में पटवारी डिंपल की ओर से तृप्ति और उसकी मां उमा देवी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। पुलिस के अनुसार आवेदन में लगाए गए आधार कार्ड में दर्ज पते के सत्यापन के दौरान भी विसंगतियां सामने आई हैं। मामले की जांच में पुलिस संबंधित दस्तावेजों और आवेदन प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों को खंगाल रही है।
एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल के मुताबिक राजस्व विभाग की शिकायत पर दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए हैं। पुलिस आरोपों की जांच के साथ ही संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है। पुलिस इस पहलू को भी जांच के दायरे में रख रही है कि कहीं फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराने में किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका तो नहीं है।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे में कथित अनियमितता सामने आने के बाद अब एससी-एसटी आरक्षण के तहत हुए एमबीबीएस दाखिलों की भी जांच शुरू कर दी गई है। एचएनबी मेडिकल यूनिवर्सिटी ने इस श्रेणी में प्रवेश लेने वाले आठ छात्र-छात्राओं को नोटिस जारी किया है। इनमें छह अभ्यर्थी सरकारी और दो निजी मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लेने वाले बताए गए हैं।
विश्वविद्यालय ने संबंधित अभ्यर्थियों को मूल निवास, जाति और आरक्षण से जुड़े सत्यापित दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। परीक्षा नियंत्रक प्रो. विजय जुयाल के अनुसार नीट-यूजी की पहली काउंसिलिंग के दौरान आरक्षण का लाभ लेने वाले कुछ अभ्यर्थियों के दस्तावेजों को लेकर शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इसके बाद दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की गई।
विश्वविद्यालय ने सभी संबद्ध मेडिकल कॉलेजों को भी निर्देश जारी किए हैं कि आरक्षण अथवा मूल निवास प्रमाणपत्र के आधार पर किए गए दाखिलों को संबंधित जिला प्रशासन से दस्तावेजों का सत्यापन होने के बाद ही स्थायी किया जाए। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।

सबसे पहले ख़बरें पाने के लिए -
👉 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें
👉 फेसबुक पर जुड़ने हेतु पेज़ लाइक करें
👉 यूट्यूब चैनल सबस्क्राइब करें
हमसे संपर्क करने/विज्ञापन देने हेतु संपर्क करें - +91 70170 85440



