अरुण नेगी मौत प्रकरण, जांच में देरी पर परिजनों का पुलिस को 48 घंटे का अल्टीमेटम

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समाचार सच, रुद्रप्रयाग। केदारनाथ यात्रा मार्ग के गौरीकुंड में 24 वर्षीय अरुण नेगी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब गंभीर होता जा रहा है। घटना के 20 दिन से अधिक समय बीत जाने के बावजूद जांच में अपेक्षित प्रगति नहीं होने का आरोप लगाते हुए परिजनों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मामले की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग करते हुए पुलिस अधीक्षक को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय में ठोस कार्रवाई शुरू नहीं हुई तो एसपी कार्यालय का घेराव कर आंदोलन किया जाएगा।

परिजनों के अनुसार, 17 जून की सुबह अरुण नेगी का शव गौरीकुंड के समीप मुनकटिया क्षेत्र में चट्टान के नीचे मिला था। मृतक के पिता आनंद सिंह नेगी का कहना है कि घटनास्थल की परिस्थितियां सामान्य दुर्घटना की ओर इशारा नहीं करतीं। उनका आरोप है कि मामले से जुड़े कई अहम तथ्यों की अब तक गंभीरता से जांच नहीं की गई है। घटना के तुरंत बाद सोनप्रयाग थाने में लिखित शिकायत देकर निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी, लेकिन अब तक जांच की दिशा और प्रगति को लेकर पुलिस की ओर से कोई संतोषजनक जानकारी नहीं दी गई।

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इसी मुद्दे को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता त्रिभुवन चौहान के नेतृत्व में परिजन पुलिस अधीक्षक नीहारिका तोमर से मिले और पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग दोहराई। मृतक के पिता ने बताया कि 16 जून की शाम अरुण केदारनाथ से घोड़े के माध्यम से गौरीकुंड के लिए रवाना हुआ था। उनके अनुसार उसके साथ उसका मित्र तेजू भी था। पुलिस की प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक दोनों गौरीकुंड पहुंचने के बाद शराब के सेवन में शामिल थे और अरुण की तबीयत बिगड़ने पर उसका साथी वहां से चला गया।

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परिजनों का कहना है कि इस घटनाक्रम से जुड़े सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध हैं, जिनकी वैज्ञानिक और निष्पक्ष जांच से कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। उन्होंने मांग की है कि घटना से पहले अरुण के संपर्क में रहे सभी लोगों से गहन पूछताछ की जाए तथा कॉल डिटेल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविकता उजागर की जाए।

इस दौरान स्वाभिमान मोर्चा के उपाध्यक्ष त्रिभुवन चौहान ने केदारनाथ यात्रा मार्ग पर कथित रूप से अवैध शराब की उपलब्धता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि यात्रा मार्ग पर शराब की बिक्री और सेवन पर प्रतिबंध के दावे किए जाते हैं, तो यात्रा पड़ावों तक शराब पहुंचने की जांच भी जरूरी है। उन्होंने पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

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