हल्द्वानी: एक पल में उजड़ गईं चार जिंदगी… फ्लाईओवर पर मौत का ऐसा मंजर कि बहन बोली- साहब, मेरे भाई को जिंदा कर दो, स्कॉर्पियो में स्कूल संचालक भी था सवार

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हल्द्वानी के गौलापार-तीनपानी फ्लाईओवर पर दर्दनाक हादसे में चार दोस्तों की मौत, चालक और वाहन में सवार स्कूल निदेशक पुलिस हिरासत में, सीसीटीवी फुटेज से खुलेगा हादसे का सच।

समाचार सच, हल्द्वानी। शनिवार रात गौलापार-तीनपानी फ्लाईओवर पर हुआ दर्दनाक सड़क हादसा पूरे कुमाऊं को झकझोर गया। कुछ ही सेकंड में चार दोस्तों की जिंदगी खत्म हो गई और डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल में ऐसा मातम पसरा कि वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। सबसे अधिक दर्द उस समय देखने को मिला, जब 17 वर्षीय राहुल राजपूत की बहन डॉक्टरों और पुलिसकर्मियों के सामने हाथ जोड़कर बार-बार कहती रही- साहब… मेरे भाई को जिंदा कर दो।

शनिवार रात करीब 10 बजे बरेली की ओर से आ रही तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने फ्लाईओवर पर खड़े चार युवकों को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि स्कॉर्पियो डिवाइडर पर चढ़ गई, उसका पहिया तक उखड़कर दूर जा गिरा और युवकों की स्कूटी भी वाहन के नीचे दब गई।

इस दर्दनाक हादसे में गोरापड़ाव हाथीखाल निवासी 17 वर्षीय राहुल राजपूत, गोरापड़ाव निवासी 25 वर्षीय शिवम, बेरीपड़ाव निवासी 20 वर्षीय अंशु आर्य और 18 वर्षीय आदित्य टम्टा की मौत हो गई। तीन युवकों को अस्पताल पहुंचते ही मृत घोषित कर दिया गया, जबकि आदित्य ने देर रात इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

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राहुल की मौत की सूचना मिलते ही उसकी मां, दोनों बहनें और भाई अस्पताल पहुंच गए। बहन कभी डॉक्टरों के सामने हाथ जोड़कर भाई को बचाने की गुहार लगाती रही तो कभी पुलिस से कहती रही कि उसका भाई लौटा दिया जाए। जब पोस्टमार्टम के लिए शव मोर्चरी ले जाया जाने लगा तो पूरा परिवार शव से लिपट गया और उसे छोड़ने को तैयार नहीं हुआ। वहां मौजूद हर व्यक्ति इस दृश्य को देखकर भावुक हो उठा। राहुल दो भाइयों और दो बहनों में से एक था और लालकुआं की एक वायर कंपनी में काम करता था।

जबकि पेंट का काम करने वाले 25 वर्षीय शिवम के माता-पिता बेटे का शव देखकर बेसुध हो गए। बड़ा भाई आकाश शव को लेकर आईसीयू तक पहुंच गया और डॉक्टरों से एक बार फिर जांच करने की गुहार लगाता रहा। उसकी हालत देखकर कुछ देर के लिए शव आईसीयू तक ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मौत की पुष्टि कर दी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसा इतना भयावह था कि टक्कर लगने के बाद स्कॉर्पियो अनियंत्रित होकर डिवाइडर पर चढ़ गई। वाहन का एक पहिया तक अलग होकर दूर जा गिरा और युवकों की स्कूटी उसके नीचे दब गई। आसपास मौजूद लोग जब तक कुछ समझ पाते, चारों युवक गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर पड़े थे।

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प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हादसे के समय स्कॉर्पियो को पहदान खान चला रहा था। वाहन में उसके साथ ज्योलीकोट स्थित नैंसी कॉन्वेंट स्कूल के निदेशक डॉ. संजय सिंह भी मौजूद थे। पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि दुर्घटना के हर पहलू की जांच की जा रही है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों को परखा जाएगा।

इधर, हादसे को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। कोई युवकों के फ्लाईओवर पर खड़े होने की बात कह रहा है तो कोई उनके गलत दिशा में होने का दावा कर रहा है। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अभी किसी भी दावे की पुष्टि नहीं की गई है।

अब जांच की सबसे अहम कड़ी फ्लाईओवर और उसके आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज होगी। इन्हीं रिकॉर्डिंग के आधार पर यह तय होगा कि दुर्घटना आखिर किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन था।

फिलहाल, हादसे ने चार परिवारों से उनके बेटे छीन लिए हैं। जिन घरों में शनिवार तक हंसी गूंज रही थी, वहां अब सिर्फ सन्नाटा, आंसू और अपनों की यादें बची हैं। पुलिस की जांच आगे बढ़ रही है, लेकिन उन परिवारों के लिए यह सच हमेशा अधूरा रहेगा कि उनके अपने अब कभी लौटकर नहीं आएंगे।

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