निस्वार्थ भाव से पक्षियों की मदद करने पर शनि, राहु और केतु से जुड़े कष्टों में राहत मिलती है

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समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। भीषण गर्मी का मौसम पक्षियों और अन्य जीवों के लिए भी कठिन होता है। ऐसे समय में उनके लिए पानी और भोजन की व्यवस्था करना एक सराहनीय कार्य है। सनातन धर्म में भी जीवों की सेवा को पुण्यदायी माना है। वहीं, ज्योतिष मान्यता है कि निस्वार्थ भाव से पक्षियों की मदद करने पर शनि, राहु और केतु से जुड़े कष्टों में राहत मिलती है। हालांकि, दाना-पानी रखते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। चलिए जानते हैं कि पक्षियों की सेवा करते हुए कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए।

दाना-पानी रखने की सही दिशा
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, पक्षियों के लिए पानी और दाना उत्तर-पूर्व दिशा, छत या बालकनी के किसी सुरक्षित स्थान पर रखना शुभ होता है। कहते हैं कि ऐसा करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और जीवन में आने वाली रुकावटें कम होती हैं।

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ऐसी जगह से करें परहेज
कई बार लोग पानी का बर्तन ऐसी जगह रख देते हैं जहां पूरे दिन तेज धूप पड़ती रहती है। इससे पानी गर्म हो जाता है और पक्षियों के लिए उपयोगी नहीं रहता। इसलिए हमेशा छायादार और ठंडी जगह का चयन करना बेहतर माना जाता है।

साफ-सफाई
पक्षियों के लिए रखा गया पानी और दाना हमेशा ताजा होना चाहिए। गंदे बर्तन या बासी भोजन से पक्षियों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए रोज सुबह-शाम पानी बदलना और पात्र की सफाई जरूर करें।

मिट्टी के बर्तन का उपयोग
धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं में मिट्टी के बर्तन सबसे उपयुक्त माने जाते हैं। इनमें पानी लंबे समय तक ठंडा रहता है, जिससे पक्षियों को गर्मी में राहत मिलती है। धातु के पात्र भी उपयोग किए जा सकते हैं, लेकिन प्लास्टिक के बर्तनों का इस्तेमाल न करें।

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सुरक्षा का भी रखें ध्यान
दाना-पानी ऐसी जगह रखें जहां बिल्लियों या अन्य शिकारी जानवरों का खतरा न हो। साथ ही जरूरत से ज्यादा दाना न रखें ताकि वह खराब न हो। पक्षियों को सुरक्षित और शांत वातावरण उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी माना जाता है।

ज्योतिषीय मान्यताएं क्या कहती हैं?
ज्योतिष शास्त्र में पक्षियों और जीवों की सेवा को शुभ कर्म माना है। मान्यता है कि कौआ, गौरैया, कबूतर जैसे पक्षियों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था करने से शनि, राहु और केतु के अशुभ प्रभाव कम हो सकते हैं।

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