समाचार सच, देहरादून। जौली ग्रांट एयरपोर्ट विस्तार मामले में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया की, देहरादून एयरपोर्ट का महत्व पर्यटको और बाहर से आने वाले लोगों के लिए ही नहीं बल्कि यह एयरपोर्ट राष्ट्रीय महत्व भी रखता है। यदि एयरपोर्ट के लिए पेड़ काटे जा रहे हैं तो उसकें बदले में वृक्षारोपण भी किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने जनता से सवाल करते हुए पूछा कि क्या वह टिहरी से आकर बसे लोगों का विस्थापन चाहती है और कहां की हालहि मे हुआ चिपको आंदोलन पूरी तरह से राजनीतिक षड्यंत्र है। मुख्यमंत्री के बयान पर देहरादून के शिक्षित छात्रों के संगठन मेकिंग अ डिफरेंस बाय बींग द डिफरेंस (मैड) ने सवाल उठाते हुए कहा, राज्य एक बार फिर से जन चिपको आंदोलन का साक्षी रहा है तथा देहरादून वासी इतनी संख्या में वन संरक्षण के लिये सडकों पर उतरे, क्या इसे भी सरकार राजनीतिक षड्यंत्र कहेगी, तथा सरकार यह स्पष्ट करें की देहरादून एयरपोर्ट राष्ट्रीय महत्व कैसे रखता है। संस्था ने यहा भी कहा की मुख्यमंत्री जी ने बयान में एक के बदले 3 पेड लगाने की बात कि वही उत्तराखंड वन विभाग द्वारा एक पेड़ के बदले 17 पेड़ लगाने की बात कही जा रही हैं,शासक दल के प्रवक्ता कह रहे की एक के बदलें 22 पेड़ लगाये जायेंगे, इस पर मुख्यमंत्री साफ शब्दों में स्पष्ट करे की सरकार द्वारा एक पेड़ के बदले कितने पेड लगाने की व्यवस्था हैं। मैड ने सरकार से सवाल पुछते हुये यह भी कहा की वन विभाग कहता आया है की वृक्षारोपण के लिये उनके पास भूमि नहीं हैं,तो जो वृक्षारोपण की बात सरकार कर रही हैं वह किस स्थान पर और कैसे होगा तथा जनता न तो टिहरी से आकर बसे लोगों का विस्थापन चाहती है और न ही जगंलों का कटान, जगंलों का नष्ट हो जाना जानवरों के जीवन के लिये बहुत बड़ा खतरा है, क्या सरकार को जानवरों के जीवन की कोई चिंता नहीं। मालूम हो की, उत्तराखंड सरकार द्वारा जौली ग्रांट एयरपोर्ट के विस्तार हेतु एक परियोजना लाई गई हैं, जिसके अनुसार थानों क्षेत्र के 10,000 पेडो का कटान अनिवार्य हैं, जिस पर देहरादून की जनता ने भारी विरोध जताया हैं।
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