समाचार सच, हल्द्वानी। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलनरत भोजन माताएं 8 मार्च को अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में प्रदर्शन करेंगी। यह जानकारी पत्रकारों से वार्ता करते हुए प्रगतिशील भोजनमाता संगठन की अध्यक्ष हंसी देवी ने दी। उन्होंने कहा कि न्यूनतम वेतनमान व स्थाई रोजगार की मांग भोजन माताएं लंबे समय से उठाती रही हैं। लेकिन उनकी मांगों की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कहा कि आज भोजनमाताओं की हालत दयनीय हो चुकी है। उन्हें मानदेय के नाम पर महज दो हजार रूपया दिया जा रहा है। जबकि उनसे स्कूलों में भोजन बनाने के अलावा साफ-सफाई समेत अन्य काम भी लिए जाते हैं। कहा कि इतने कम मानदेय में भोजनमाताओं के समक्ष परिवार के भरण-पोषण की समस्या उत्पन्न हो गई है। जिसके चलते उन्होंने अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर गैरसैंण में प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। संगठन की महामंत्री रजनी जोशी ने कहा कि प्रदेश सरकार का रवैया भोजन माताओं के प्रति उदासीन होता चला जा रहा है। सरकार न्यूनतम वेतन लागू करने के बजाए भोजनमाताओं को निकालने के शासनादेश पास कर रही है। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि भोजनमाताओं को न्यूनतम वेतन 15000 रुपये व स्थाई रोजगार दिया जाना चाहिए। कहा कि मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रहेगा। इस दौरान नीता, दीपा उप्रेती, पुष्पा कुड़ाई मुख्यरूप से मौजूद रहीं।
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