sumitra nandan pant

‘‘पर्वत सपूत सुमित्रानन्दन तुमको शत बार नमन’’

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उत्तर दिशि कुर्मांचल के धवल हिम पर्वत चरण
बसा ग्राम शैलानी नाम कौसानी बुरांश बाँज के कानन
मई उन्नीस सौ ईस्वी में फूटी यहाँ एक उजली किरन
जिसकी आमा से आलोकित हुआ हिन्दी साहित्य नवसर्जन
पिता गंगादत्त के घर जन्मे उनके चौथे पुत्र रतन
माँ सरस्वती के आँगन में महक उठा एक सुन्दर सुमन

वाल्सल्य मयी माँ चल बसी मात्र कुछ घंटों का लेकर दर्शन
तब शिशु गुसाँई दत्त का शैशव बीता निज बुआ सदन
यहीं गाँव की पाठशाला में हुआ प्राथमिक ज्ञान से मजिअर्जन
तदोपरान्त काशी में लिया उच्च ज्ञान का मार्ग दर्शन
सफल हुई साधना कालाकंकर में गुसाई दत्त बने सुमित्रानन्दन

बही लेखनी काव्यधरा में हुआ साहित्य में नव लेखन
लिखे अनेकों ग्रन्थ उत्तरा स्वर्णधूलि वीणा पल्लव गंुजन
किया-पल्लाविनि रश्मिबन्ध और चिदम्बरा का संचयन
दिया साहित्य को श्री रामखण्ड काव्य महाकाव्य लोकायतन
बने प्रकृति के सुकुमार कवि छायावाद का हुआ पुर्नमूल्यांकन
हिन्दी गद्य पद्य के विविध विधाओं में भी किया नया परीक्षण

रम्य रूप प्रकृति व रहस्यवाद का काव्यों में किया मार्मिक वर्णन
प्रगति वाद से आध्यात्मिक वाद तक हुआ अनवरत तुम्हारा चितंन
नयी कल्पना छायावाद की भरे भाव राष्ट्रवाद में नव नूतन
कभी कृषक रूप सांस्कृतिक चेतना, सुःख दुःख पीड़ा क्रन्दन
सुरताल रीत रचित मधुर गीत काव्य कलेवर सकल रसरंजन
साहित्य की बहुविद्या विविध कला श्रृंगार प्रकृति छवि दर्शन

काव्य कलेवर गाम्भीर्य भाव युक्त हिन्दी साहित्य मन दर्पण
कुछ कविता छन्द बद्ध कुछ मुक्तक पद्य लेकर अंलकारिक अवलम्बन
अद्धभुत शैली व्यंग हास उपहास हर्ष विवाद मिश्रित सा व्यंजन
आठो रस दिये परोस बना काव्य सरस भावों का कर मंथन
छू लेती कविताओं की रसधार बसन्त बयार सा मानव का अर्न्तमन
काव्य चेतना के कलाकार प्रिय सुकुमार जगा दिया तुमने जड़ चेतन

हे ज्ञान पारखी राष्ट्र प्रेमी सरल छवि श्रेष्ठ कवि मणिरतन
पर्वत सपूत साहित्य के अग्रदूत चिन्तक सृजक पंत सुमित्रानन्दन
है तुमको शत बार नमन। शत बार नमन।।

रचियता:
शिवराज भण्डारी
हिम्मतपुर तल्ला, हल्द्वानी (नैनीताल)
मो0 7534867653

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