परमा एकादशी हर साल नहीं आती, बल्कि 3 साल में एक बार आने वाले ‘अधिक मास’ (मलमास या पुरुषोत्तम मास) के कृष्ण पक्ष में आती है

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समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। परमा एकादशी हिंदू धर्म में बेहद दुर्लभ और महत्वपूर्ण एकादशी मानी जाती है। यह एकादशी हर साल नहीं आती, बल्कि लगभग 3 साल में एक बार आने वाले ‘अधिक मास’ (मलमास या पुरुषोत्तम मास) के कृष्ण पक्ष में आती है। शास्त्रों के अनुसार, ‘परमा’ शब्द का अर्थ है ‘सर्वाेच्च’। इस व्रत को करने से व्यक्ति के जीवन से दरिद्रता दूर होती है, सुख-समृद्धि आती है और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है।

परमा एकादशी का उल्लेख पुराणों में भी मिलता है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से जीवन के कष्ट दूर होते हैं, आर्थिक समस्याओं में राहत मिलती है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। जो श्रद्धालु पूरे श्रद्धा भाव से इस दिन उपवास रखते हैं और भगवान नारायण की आराधना करते हैं, उन्हें विशेष फल की प्राप्ति होती है।

चूंकि अधिक मास भगवान विष्णु को समर्पित है, इसलिए इस महीने में आने वाली ‘परमा एकादशी’ का महत्व बाकी अन्य एकादशियों से कहीं अधिक बढ़ जाता है। वर्ष 2026 में अधिक मास ज्येष्ठ के महीने में यह पावन व्रत 11 जून 2026, दिन गुरुवार को रखा जाएगा।

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इस तरह करें पूजा, जानें विधि
परमा एकादशी के दिन भगवान विष्णु के ‘पुरुषोत्तम’ रूप की पूजा की जाती है। इसकी विधि इस प्रकार हैरू

ब्रह्म मुहूर्त में शुरुआत
एकादशी के दिन सुबह सूर्याेदय से पहले उठकर स्नानादि से निवृत्त हो जाएं। संभव हो तो पीले रंग के साफ वस्त्र धारण करें।

व्रत का संकल्प
हाथ में जल लेकर भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें।

पूजा की तैयारी
घर के मंदिर में एक छोटी चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।

अभिषेक और श्रृंगार
भगवान श्रीहरि को गंगाजल से स्नान कराएं। उन्हें पीले चंदन का तिलक लगाएं, पीले फूल, फल और तुलसी दल/ तुलसी के पत्ते मुख्य रूप से अर्पित करें। (ध्यान रखें कि एकादशी के दिन तुलसी नहीं तोड़ी जाती, इसलिए एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें)।

भोग और आरती
भगवान को सात्विक चीजों या फलों का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाकर विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें या ‘ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें। अंत में माता लक्ष्मी और विष्णु जी की आरती करें।

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रात्रि जागरण का महत्व
इस एकादशी पर रात के समय सोना नहीं चाहिए। रात में भगवान के भजनों, कीर्तन या मंत्रों का जाप करते हुए समय बिताना अत्यंत फलदायी माना गया है।।स्ैव् त्म्।क्रू परमा एकादशी 2026रू कब है व्रत? जानें तिथि, महत्व, पूजा विधि और जरूरी नियम

परमा एकादशी व्रत के जरूरी नियम
दशमी से ही शुरुआत

व्रत के नियम एक दिन पहले यानी दशमी तिथि की रात से ही शुरू हो जाते हैं। दशमी की रात को सात्विक और हल्का भोजन करना चाहिए।

चावल का निषेध
एकादशी के दिन घर में चावल बनाना और खाना पूरी तरह वर्जित होता है। व्रत रखने वालों के साथ-साथ परिवार के अन्य सदस्यों को भी इस दिन चावल नहीं खाने चाहिए।

फलाहार या निर्जला
यह व्रत अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार रखना चाहिए। आप चाहें तो केवल पानी पीकर (निर्जला) या फिर फल, दूध और कुट्टू-सिंघाड़े का आटा जैसी फलाहारी चीजों का सेवन करके व्रत रख सकते हैं।

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