पारिवारिक दूरियां नजदीकियों में बदली
समाचार सच, हल्द्वानी। लॉकडाउन में भले ही लोगों के घरों में रहने को मजबूर है। लेकिन इसका एक सकारात्मक पक्ष भी देखने में आ रहा है। दूर-दूर या घर में अलग – अलग रहने वाले लोगों के सम्बन्धों में मिठास देखने को मिल रही है। यहां तक कि वर्षों से अलग-अलग चूल्हों में बंटे लोग भी एक ही छत के नीचे खाना बनाते हुए देखे जा रहे हैं।
गौरतलब है कि महानगरीय संस्कृति में एकल परिवारों का फैशन से बढ़ता जा रहा है। यहां तक कि इन रिश्तों में माता-पिता को भी तरजीह नहीं दी जाती है। वहीं एक ही घर में जो सगे परिवार भी रहते हैं उनकी रसोई भी अलग होती है उनमें मुलाकात भी औपचारिक होती है। इधर लॉकडाउन के बाद जब लोग घरों में रहने को मजबूर हैं तो इससे आपसी परिजनों में सम्बन्धों की मिठास देखने को मिल रही है।
नाम न छापने की शर्त में एक महिला रेखा (काल्पनिक) ने बताया कि उनका परिवार एक ही छत के नीचे विगत 10 वर्षों से रह रहा है। यहां पर दो भाई उनका परिवार व सास-ससुर रहते हैं लेकिन सभी का कहना व चूल्हा अलग-अलग है वहीं उनका कहना है कि आजकल उनके घर का माहौल भी बदल गया है। अक्सर पहले अलग – अलग रसोइयों में खटकने वाली औरतें एक ही रसोई में साथ – साथ खाना बना रही हैं। बुजुर्गों के अनुसार यह एक शुभ संकेत है। कुछ लोगों का मानना है इससे बिखरते परिवारों को फिर से मजबूती का सिम्बल मिलेगा। हालांकि यह दौर भी लम्बा नहीं चलने वाला है देर-सवेर लॉकडाउन खुलेगा तो फिर से लोग अपने – अपने चूल्हों की तरफ झांकेंगे। हालांकि लॉकडाउन ने लोगों को कुछ दिन एक साथ रहने का सुखद झौंका जरूर प्रदान किया है।

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