
समाचार सच, हल्द्वानी (डा. नेहा शर्मा)। बच्चों के साथ यौन प्रक्रिया का भाव रखने वाले व्यक्ति बाल यौन अपराधी साइकोपैथ होते हैं। यह लोग पीडोफीलिया नाम की मानसिक बीमारी से पीड़ित हेाते हैं। ये लोग सामान्य व्यक्तियों की श्रेणी में नहीं आते हैं पर दिखते समय सामान्य लगते हैं। ये एक तरह कि व्यक्तित्व विकार पर्सनैलिटीज डिसआर्डर है। इस तरह के व्यक्ति छोटे बच्चों या कम उम्र को यह प्यार से नहीं बल्कि हवस की नजरों से देखते हैं। इस तरह के व्यक्ति खुद की नजरों में सही होते हैं क्योंकि सही गलत समझने की उनकी बौद्विक क्षमता नहीं होती है। ऐसे व्यक्ति को बचपन से आवश्यक प्यार नहीं मिल पता है। इनसे इनके मन में अपनी जिंदगी मे संतुष्टि न होने पर ये लोग सेक्सूअल फस्ट्रेसन यानी कुंठित होते हैं।
मनोचिकित्सक नेहा ने छोटे बच्चों का यौन अपराध में सहभागिता के सवाल पर कहा कि यह एक प्रकार की संवेगात्मक अस्थिरता है। उन्होंने कहा कि किशोरावस्था में हार्मोन परिवर्तन के कारण सेक्सुअल भावना का उत्पन्न होना सामान्य प्रक्रिया है। सांयोगिक अस्थिरता व ज्ञान के अभाव के कारण दो सालों तक इस प्रकार के अपराध को झेलने के लिए हो सकता हो कि उन बच्चों पर अपने पिता का दबाव रहा हो या उनके अन्दर डर की भावना घर कर गयी हो। उन्होेंने कहा कि हो सकता है कि इससे बच्चों के अन्दर कुंठित भावना आ गयी हो जिससे उन्होेंने घर से भागने का प्रयास किया।
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