2027 की रणभेरी से पहले हल्द्वानी में सियासी हलचल तेज, क्या भाजपा का नया चेहरा बनेंगे शंकर कोरंगा?

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समाचार सच, हल्द्वानी। 2027 के विधानसभा चुनाव भले अभी दूर हों, लेकिन हल्द्वानी की सियासत में अभी से हलचल तेज हो चुकी है। सवाल एक ही है-आख़िर 2027 में भाजपा हल्द्वानी से किस चेहरे पर दांव खेलेगी? इसी सवाल को लेकर राजनीतिक गलियारों में कयासों का बाजार गर्म है।

इस सियासी महासमर में उतरने के लिए कई धुरंधर अपनी-अपनी गोटियां बिछाने में जुट गए हैं। हालांकि भाजपा संगठन की ओर से अभी टिकट को लेकर औपचारिक प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है, लेकिन संभावित दावेदारों की चर्चाएं ज़ोर पकड़ने लगी हैं। इन्हीं चर्चाओं के बीच दर्जाधारी मंत्री शंकर कोरंगा का नाम तेजी से उभरकर सामने आ रहा है।

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भाजपा के युवा और सक्रिय नेता शंकर कोरंगा पिछले दो दशकों से राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। मूल रूप से बागेश्वर निवासी कोरंगा उन नेताओं में शुमार हैं, जिनकी राजनीतिक पकड़ कुमाऊं से लेकर राजधानी देहरादून तक मानी जाती है। संगठन के प्रति उनकी निष्ठा और निरंतर सक्रियता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें अपनी सरकार में दर्जाधारी मंत्री का दायित्व सौंपा।

राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा आम है कि शंकर कोरंगा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विश्वस्त और खासमखास नेताओं में गिने जाते हैं। दर्जाधारी बनने से पहले भी वे संगठन में लगातार सक्रिय रहे और जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ उनका सीधा संवाद बना रहा।

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दिलचस्प बात यह है कि दर्जाधारी पद मिलने के बाद शंकर कोरंगा की हल्द्वानी में सक्रियता लगातार बढ़ी है। सामाजिक कार्यक्रमों से लेकर संगठनात्मक बैठकों तक उनकी मौजूदगी ने राजनीतिक जानकारों का ध्यान खींचा है। जानकारों का मानना है कि भाजपा यदि 2027 में युवा, संगठन से जुड़े और मुख्यमंत्री के करीबी चेहरे पर भरोसा करती है, तो शंकर कोरंगा एक मजबूत दावेदार के रूप में उभर सकते हैं।

फिलहाल टिकट की घोषणा में वक्त है, लेकिन इतना तय है कि हल्द्वानी की राजनीति में शंकर कोरंगा की बढ़ती सक्रियता आने वाले समय में कई सियासी समीकरण बदल सकती है।

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