समाचार सच, हल्द्वानी। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता दीपक बल्यूटिया द्वारा मुख्यमंत्री द्वारा गैरसैंण को एक और कमिश्नरी मुख्यालय बनाकर सरकार ने अपने मानसिक दिवालियापन होने का प्रमाण दे दिया है उक्त विचार प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता दीपक बल्यूटिया ने कहे, उनका कहना था कि वर्तमान परिपेक्ष में जहाँ छोटे राज्य हैं वहाँ देश भर में कमिश्नरी के अस्तित्व को लेकर बहस छिड़ी है कि कमिश्नरी को रखा जाना कितना औचित्यपूर्ण है। ऐसे में बिना अध्ययन व समीक्षा के इस तरह की घोषणा से राज्य सरकार की 2022 के चुनाव को लेकर घबराहट दर्शाती है। अच्छा होता कि डबल इंजन की सरकार उत्तराखण्ड को नए विकास खण्ड देती जिन्हें केन्द्र से सहायता दिलाकर गाँवों का विकास करती। मुख्यमंत्री की स्थिति उस विद्यार्थी की तरह है जिसने चार साल नींद मे निकाल दिए और अब सामने चुनावी इम्तिहान देख बिना किसी अध्ययन व समीक्षा किए बिन चुनावी हड़बड़ाहट में घोषणाएँ कर जनता गुमराह कर रहे हैं।
जहाँ वर्तमान कमिश्नरी मुख्यालय में अधिकारी नही बैठ रहें वहीं एक और कमिश्नरी मुख्यालय बनाकर त्रिवेंद्र सरकार ने राज्य में अतिरिक्त बोझ डालकर सर्वे में सबसे फिसड्डी मुख्यमंत्री होने का प्रमाण दे दिया है। सरकार के पास कर्मचारियों को वेतन देने के लिए पैसे नहीं है, वही विधवा, बुजुर्ग, दिव्याँग पेंशन भी रोक दी गई है।
उन्होंने कहा कि गैरसैण में आधारिक संरचना के विकास की योजना, पलायन, बेरोज़गारी, महँगाई, चिकित्सा, शिक्षा जैसे गम्भीर मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए इस तरह के चुनावी पासे फेंक जनता को गुमराह कर रही है इससे तो अच्छा होता कि नई चुनावी घोषणा करने से पहले मुख्यमंत्री अपने २०१७ के घोषणा पत्र पर भी नज़र डाल लेते तो बेहतर होता, क्योंकि चुनाव सामने देख मुख्यमंत्री कई बार पुरानी घोषणाओं की ही दुबारा घोषणा कर बैठे, पूर्व से चलती हुई योजना का दुबारा लोकार्पण कर दिया, ऐसे में उत्तराखण्ड राज्य में रोज़गार व विकास की परिकल्पना कैसी की जा सकती है, यह एक सोचनीय विषय है।
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