समाचार सच, बद्रीनाथ-केदारनाथ डेस्क। उत्तराखंड के द्वितीय केदार मदमहेश्वर मंदिर के कपाट गुरुवार को वैदिक मंत्रोच्चारण, पूजा-अर्चना और भक्तों के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। पूर्वाह्न 11:30 बजे कर्क लग्न में जैसे ही कपाट खुले, पूरा धाम “हर-हर महादेव” के उद्घोष से गूंज उठा। मंदिर को आकर्षक फूलों से सजाया गया है, जिससे धाम की भव्यता और बढ़ गई है।
कपाट खुलने के साथ ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दर्शन के लिए उमड़ पड़ी। पहले ही दिन 1135 भक्तों ने भगवान मदमहेश्वर के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए सभी के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। वहीं समिति के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं।
मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने बताया कि भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह डोली 19 मई को ओंकारेश्वर मंदिर से रवाना हुई थी। यात्रा के दौरान डोली ने पहले पड़ाव पर राकेश्वरी मंदिर में विश्राम किया और 20 मई को हक-हकूकधारियों के गांव गौंडार पहुंची। गुरुवार सुबह डोली मदमहेश्वर धाम पहुंची, जहां पुजारी शिवशंकर लिंग ने विधि-विधान से कपाट खुलवाए। इस अवसर पर भगवान मदमहेश्वर के स्वयंभू शिवलिंग को समाधि रूप से श्रृंगार रूप में विराजमान किया गया।



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