समाचार सच, हल्द्वानी। अक्सर कहा जाता है कि “पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी पहाड़ के काम नहीं आती।” लेकिन इस कहावत को दूसरे राज्यों से लौटे कुछ प्रवासी उत्तराखंडियों ने गलत साबित करके दिखाया है। उन्होंने कुछ ऐसा किया है जिससे की पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी दोनों ही पहाड़ के लोगों की भलाई में काम आई है। हुआ कुछ यूं कि बागेश्वर के गरुड़ ब्लॉक के सुदूरवर्ती गाँव सिमखेत में कुछ प्रवासी युवाओं को अपने ही गांव के विद्यालय सरस्वती शिशु मंदिर में क्वॉरेंटाइन किया गया था।

गाँव के ये युवा जोकि अन्य राज्यों में आजीविका हेतु कार्य कर रहे थे कोरोना संकट के कारण अपने गाँव लौट आये हैं। क्वॉरेंटाइन सेंटर में इन सभी लोगों ने क्वॉरेंटाइन के नियमों का पूर्णतः पालन भी किया। तभी इस समयावधि का सदुपयोग करने हेतु ललित सिंह किरमोलिया के नेतृत्व में इन युवाओं ने स्वयं ही विद्या भारती के इस विद्यालय की साफ सफाई, रंग रोगन व अन्य मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्त करने की ठानी। जिसमें ग्रामवासियों द्वारा भी सामग्री उपलब्ध कराई गई।

इस क्रम में इन युवाओं ने ना केवल विद्यालय की साज सज्जा हेतु पुताई की बल्कि 2019 में आपदा के कारण हुए नुकसान को भी ठीक किया। साथ ही विद्यालय में फूलों व वृक्षों का रोपण भी किया।

युवाओं से बात करने पर पता चला कि वे भविष्य में और लोगों के सहयोग से गांव में अन्य तरह के सामाजिक कार्य जैसे जल संवर्धन, स्वच्छता व वृक्षारोपण के कार्य करेंगे। इन सामाजिक कार्यों में बायफ़ डेवलपमेंट रिसर्च फाउंडेशन के परियोजना अधिकारी पुष्कर बिष्ट ने भी युवाओं को हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया है। विद्यालय के कायाकल्प में ललित सिंह किरमोलिया, जगदीश सिंह किरमोलिया, देवेंद्र सिंह किरमोलिया, रमेश सिंह किरमोलिया, प्रकाश सिंह किरमोलिया, रविन्द्र सिंह किरमोलिया, संजय सिंह किरमोलिया, कृष्ण सिंह किरमोलिया तथा भगवत सिंह किरमोलिया आदि ने सहयोग किया।
ये सभी युवा आज क्षेत्र के अनेक युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बन गए हैं।

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