सर्दी, जुकाम, अस्थमा जैसी श्वसर से जुड़ी बीमारियों को दूर कर शरीर को स्वस्थ रखती है ये आयुर्वेदिक जड़ी बूटी

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समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। आयुर्वेद में कंटकारी बहुत उपयोगी जड़ी बूटी है और व्यापक तौर पर इसका इस्तेमाल सर्दी, जुकाम, अस्थमा और ऐसे कई श्वसन मार्ग से जुड़ी स्थितियों के इलाज में किया जाता है। दस जड़ी बूटियों के समूह यानी दशमूल में से एक कंटकारी यानी कटेरी भी है। कंटकारी का मतलब होता है जो गले के लिए अच्छी हो। ये लैरिंजाइटिस और गले में खराश आदि समस्याओं को दूर करने की क्षमता रखती है।

आइए जानते हैं ये आयुर्वेदिक जड़ी बूटी स्वास्थ्य के लिए किस तरह फायदेमंद होती है।

कटेरी जड़ी बूटी कितनी मात्रा में लेनी चाहिए
इस जड़ी बूटी का पूरा पौधा, जड़ और फल उपयोग में लाया जाता है। इसका पाउडर 1 से 3 ग्राम, काढ़ा 40 से 80 मि.ली लेना सुरक्षित रहता है। मरीज की स्थिति और बीमारी के आधार पर इस जड़ी बूटी का रूप और खुराक निर्धारित की जाती है।

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कटेरी जड़ी बूटी के औषधीय गुण
कटेरी बूटी को रस के रूप में लेने पर इसका स्वाद कसैला और कड़वा होता है। ये हल्की, सूखी और तीक्ष्ण होती है। भोजन कुटुहलम के अनुसार कटेरी का फल स्घ्वाद में कसैला होता है और इसका गर्म प्रभाव रहता है। ये पाचन अग्नि को उत्तेजित करती है और डिस्पेनिया एवं खांसी का इलाज करती है। इससे राइनाइटिस, दर्द, असंतुलित वात एवं कफ दोष और बुखार का इलाज भी होता है।

कटेरी के स्वास्थ्यवर्द्धक लाभ –

  • कंटकारी के रस के साथ शहद लेने पर डिस्युरिया यानी पेशाब करने में दिक्क्त की समस्या का इलाज होता है।
  • खांसी के इलाज के लिए कंटकारी सबसे बेहतरीन जड़ी बूटी है।
  • गर्म प्रभाव और कसैले स्वाद के कारण कटेरी कफ और वात को ठीक करने का गुण रखती है। ये प्राकृतिक रूप से पाचन में सुधार लाकर पाचन तंत्र को मजबूत करती है। सांस से जुड़े विकारों को दूर करने के लिए व्यापक रूप से कटेरी का इस्तेमाल किया जाता है।
  • एनोरेक्सिया (भूख न लगना), बुखार, वात दोष में असंतुलन के कारण हुए विकारों, अत्यधिक खुजली, त्वचा रोगों, पेट में कीड़े होने, हृदय विकारों, शीघ्रस्खलन आदि समस्याओं के इलाज में कटेरी उपयोगी है।
  • इसके बीज मासिक धर्म और प्रसव में होने वाले दर्द को कम करने में मदद करते हैं।
  • इससे मोटापा घटाने और शरीर में जमा कोलेस्ट्रोल को हटाने में भी सहायता मिलती है।
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कंटकारी के नुकसान

  • चूंकि कंटकारी गर्म होती है इसलिए पित्त विकारों के लिए इसका इस्तेमाल सावधानीपूर्वक करना चाहिए।
  • बच्चों और स्तनपान करवाने वाली महिलाओं के लिए कटेरी लाभकारी है।
  • गर्भावस्था के दौरान कटेरी ले सकते हैं लेकिन इससे आपको अपने डॉक्घ्टर से बात कर लेनी चाहिए।
  • गर्भावस्घ्था में उल्टी और मतली से बचने के लिए 5-6 किशमिश और 5 ग्राम कटेरी को पानी में उबालकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े को रोज पीएं।
  • वहीं अगर आपको लिवर से जुड़ी कोई परेशानी है तो कटेरी का काढ़ा पीने से लिवर में संक्रमण और सूजन कम करने में मदद मिलती है।
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