उत्तराखण्ड में गंगा दशहरा पर्व पर द्वार पत्र लगाने की परंपरा, जानिए क्यों घर के द्वार पर लगाते हैं यह पत्र…

खबर शेयर करें

समाचार सच, अध्यात्म डेस्क (पं0 गिरीश पलड़िया)। गंगा दशहरा के पर्व पर घरों में गंगा दशहरा द्वार पत्र लगाने को बहुत ही शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस द्वार पत्र लगाने से घर में विनाशकारी शक्तियां प्रवेश नहीं करती हैं और वज्रपात, बिजली गिरने जैसी घटनाओं से बचाव होता है। इसके साथ घर में नकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश को भी यह द्वार पत्र रोकता है तथा घर में सुख समृद्धि बनी रहती है। उत्तराखंड में यह परंपरा प्रमुख रूप से प्रचलित है।
उत्तराखंड में इस पत्र को घर के मुख्य दरवाजे पर लगाने की परंपरा है। इस पत्र को विशेष तौर पर तैयार किया जाता है. भोज पत्र या फिर श्वेत पत्र पर मंत्रों को लिखकर दरवाजे पर यह पत्र चिपकाए जाते हैं. यह पत्र वर्गाकार होना चाहिए. इस पत्र पर भगवान शिव, गणेश, दुर्गा, सरस्वती, गंगा आदि का रंगीन चित्र बना कर उसके चारों तरफ एक वृतीय या बहुवृत्तीय कमलदलों की आकृति बनाई जाती है. लाल, पीले और हरे रंगों का प्रयोग किया जाता है।

यह भी पढ़ें -   पंतनगर में गुंडागर्दी: 10 हजार और मोबाइल न देने पर युवक पर सरेराह चाकू से जानलेवा हमला, मुकदमा दर्ज

द्वार पत्र का श्लोक
गंगा दशहरा द्वार पत्र एक सिद्ध पत्र माना जाता है. मान्यताओं के अनुसार पत्र के अंदर रंगों का प्रयोग किया जाता है और बाहर की तरफ वज्र निवारक पांच ऋषियों के नाम के साथ श्लोक लिखे जाते हैं-

अगस्त्यश्च पुलस्त्यश्च वैशम्पायन एव च।
जैमिनिश्च सुमन्तुश्च पञ्चैते वज्र वारका:।।1।।
मुने कल्याण मित्रस्य जैमिनेश्चानु कीर्तनात।
विद्युदग्निभयंनास्ति लिखिते च गृहोदरे।।2।।
यत्रानुपायी भगवान् हृदयास्ते हरिरीश्वर:।
भंगो भवति वज्रस्य तत्र शूलस्य का कथा।।3।।

यह भी पढ़ें -   उत्तराखंड में बदला मौसम का मिजाज, बारिश और ठंडी हवाओं से मिली राहत

गंगा दशहरा के दिन द्वार पत्र को स्थापित किया जाता है
यह पत्र गंगा दशहरा के दिन दरवाजे पर स्थापित किया जाता है। गंगा का उद्गम स्थान गंगोत्री है. इस दिन उत्तराखंड में घरों के दरवाजों पर दशहरा के द्वार पत्र लगाने की परंपरा है। इस पत्र को स्थापित करने के बाद दान देना शुभ माना गया है।
इस दिन लोग चीनी और कालीमिर्च का शरबत भी तैयार करते हैं। यह माना जाता है कि इस दिन यदि इस शरबत का सेवन किया जाय तो परिवार के लोग वर्ष पर्यन्त निरोग रहते हैं।

Ad AdAd Ad Ad Ad AdAd Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad

सबसे पहले ख़बरें पाने के लिए -

👉 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें

👉 फेसबुक पर जुड़ने हेतु पेज़ लाइक करें

👉 यूट्यूब चैनल सबस्क्राइब करें

हमसे संपर्क करने/विज्ञापन देने हेतु संपर्क करें - +91 70170 85440