देव दिवाली 12 को, क्यों मनाई जाती है देव दिवाली

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-क्या है पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

समाचार सच। 12 नवंबर को देव दिवाली का पर्व मनाया जायेगा। माना जाता है कि इस दिन देवता धरती पर आते हैं। इसलिए इस दिन पूजा पाठ करने का काफी ज्यादा महत्व माना गया है। मुख्य रूप से ये पर्व शिव की नगरी काशी में मनाया जाता है। जिसे लेकर मान्यता है कि देवताओं के कहने पर कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर राक्षस का वध किया था। जिसकी खुशी में देवताओं ने शिव की नगरी काशी में दीप दान किया। तभी से देव दिवाली मनाने की परंपरा चली आ रही है। इस दिन बड़ी संख्या में लोग बनारस आते हैं और गंगा के घाटों पर दीप प्रज्जवलित करते हैं।

देव दिवाली का शुभ मुहूर्त
देव दीपावली मंगलवार, नवम्बर 12, 2019 को
प्रदोषकाल देव दीपावली मुहूर्त -05:08 पी एम से 07:45 पी एम
अवधि -02 घण्टे 38 मिनट्स
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ -नवम्बर 11, 2019 को 06:02 पी एम बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त – नवम्बर 12, 2019 को 07:04 पी एम बजे

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देव दिवाली पूजा विधि

-देव दीपावली के दिन सूर्य उगने से पूर्व उठकर गंगा स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इस दिन गंगा स्नान करने से पुण्य की प्राप्घ्ति होती है। अगर गंगा स्नज्ञन करना संभव न हो तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान कर लें।
-इसके बाद भगवान गणेश, फिर शिव शंकर और भगवान विष्णु की विधिवत् पूजा करनी चाहिए।
-शाम के समय भगवान शिव की फिर से पूजा करें। उन्हें फूल, घी, नैवेद्य और बेलपत्र अर्पित करें।

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-इसके बाद इन मंत्रों का जाप करें-
‘ऊं नमः शिवाय’,
‘ऊं हौं जूं सः, ऊं भूर्भुवः स्वः
ऊं त्र्यम्बेकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धूनान् मृत्योवर्मुक्षीय मामृतात्,
ऊं स्वः भुवः भूः, ऊं सः जूं हौं ऊं

  • इसके बाद भगवान विष्णु को पीले फूल, नैवेद्य, पीले वस्त्र और पीली मिठाई अर्पित करें। मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान विष्णु ने मतस्यावतार लिया था।
  • अब इन मंत्रों का जाप करें-
    ऊं नमो नारायण नमः
    नमो स्तवन अनंताय सहस्त्र मूर्तये, सहस्त्रपादाक्षि शिरोरु बाहवे।
    सहस्त्र नाम्ने पुरुषाय शाश्वते, सहस्त्रकोटि युगधारिणे नमरू ।।
    -इन मंत्रों के जाप के बाद भगवान शिव और विष्णु को धूप-दीप दिखाकर उनकी आरती उतारें।
  • तुलसी जी के पास भी दीपक जलाएं।
  • संभव हो तो गंगा घाट जाकर दीपक जलाएं। अगर गंगा घाट जाना संभव न हो तो घर के अंदर और बाहर दीपक जलाएं।
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