मेनोपॉज के बाद रखेंगे इन बातों का ध्यान, सेहत रहेगी दुरुस्त

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समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। 41-50 की उम्र में पीरियड्स बंद होने के बाद महिलाओं में होते हैं हार्माेनल बदलाव, 40 की उम्र के करीब पहुंच चुकी महिलाओं को सेहत के प्रति सचेत हो जाना चाहिए। 41 से 50 वर्ष की उम्र के बीच महिला भारत में मासिक चक्र से मुक्त हो जाती है डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार। 30 से 40 फीसदी महिलाओं में मेनोपॉज (रजोनिवृत्त्ति) के बाद हड्डियां कमजोर होने की तकलीफ होने लगती है।
महिलाओं के जीवन का एक अहम पड़ाव है 40 से 50 वर्ष की उम्र जब उनमें मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) होता है। इसमें कई शारीरिक व मानसिक बदलाव होते हैं। तनाव, उदासी, बेचौनी, घबराहट, भ्रम, चिड़चिड़ापन, दुविधा की स्थिति, अनिद्रा और गुस्सा आने जैसे लक्षण होते हैं। हॉट फ्लशेज (अधिक गर्मी लगना, बुफारे आना), यूरिन में जलन, जननांग में संक्रमण जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में शक्कर से परहेज करना चाहिए।

मेनोपॉज के बाद रखेंगे इन बातों का ध्यान, सेहत रहेगी दुरुस्त
मेनोपॉज की स्थिति में महिला को घबराने की जरूरत नहीं है। मेनोपॉज के दौरान किसी भी शारीरिक तकलीफ को नजरअंदाज न करें। 40 की उम्र के बाद करीब एक साल तक मासिक धर्म नहीं आता है तो इसे मेनोपॉज की अवस्था माना जाता है। मासिक धर्म धीरे-धीरे कम होता है। एक दो साल के भीतर पूरी तरह बंद हो जाता है। इसका कारण शरीर में एस्ट्रोजन हॉर्माेन की मात्रा का कम होना होता है। इस समय शक्कर खाने से परहेज करना चाहिए क्योंकि इसे खाने से हड्डियों में दर्द बढ़ता है। बीपी, थायरॉइड, मधुमेह वजन, पैपस्मीयर, मैमोग्राफी की जांच जरूरी है।

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गुनगुने पानी से नहाना –
शरीर में अधिक गर्मी को मेडिकली (हॉट फ्लशेज) कहते हैं। इससे बचाव के लिए मसालेदार और चटपटा भोजन खाने से बचना चाहिए। शराब, सिगरेट, चाय, कॉफी से परहेज करें। ढीले व सूती कपड़े पहनें। रात को सोने से पहले गुनगुने पानी से नहाएं। तनाव न लें।

संक्रमण से बचाव की दवा दी जाती है –
मेनोपॉज के दौरान जननांग में संक्रमण का खतरा रहता है। इससे बचाव के लिए ध्यान रखने की जरूरत होती है। संक्रमण होने पर क्रीम और कुछ एंटीबायोटिक दवाएं चलती हैं जिनसे आराम मिलता है। जननांग में संक्रमण होने पर पानी ज्यादा से ज्यादा पीना चाहिए। महिला को ग्वार फली, भिंडी, आलू, मटर, चना और गोभी नहीं खानी चाहिए।

कुछ साल तक होती ऐसी परेशानी –

  • ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियां कमजोर होती हैं।
  • हल्की चोट पर भी हड्डी टूटने की अधिक आशंका हार्ट और ब्लड प्रेशर संबंधी तकलीफ बढ़ सकती है।
  • ऑस्टियो ऑर्थराइटिस से जोड़ो में दर्द रहना।
  • उम्र बढऩे के साथ मस्तिष्क शिथिल पड़ना ।
  • याददाश्त भी कम होने लगती है।
  • महिला को हमेशा घबराहट, झुंझलाहट होना।
  • भूख नहीं लगना और सेहत नहीं बनना।
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ऐसे कम कर सकते हैं तकलीफ –

  • नियमित व्यायाम के साथ घूमना टहलना चाहिए
  • वो काम करें जो पसंद हो, खुद को व्यस्त रखें
  • योग के साथ ध्यान लगाएं और प्राणायाम करें
  • तनाव से दूर रहें, किसी चीज की चिंता न करें
  • कोई बात मन में न रखें, परिवार से साझा करें

एचआरटी सबसे बेहतर इलाज –
मेनोपॉज के बाद शारीरिक तकलीफ से राहत देने के लिए हॉर्माेन रिप्लेसमेंट थैरेपी (एचआरटी) देते हैं। एचआरटी से पहले पैपस्मियर और मैमोग्राफी टेस्ट कराने के बाद एचआरटी की डोज तय होती है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में इस प्रक्रिया को पूरा करते हैं।

इन चीजों से पूरी होगी एस्ट्रोजन की कमी –
एस्ट्रोजन की कमी को पूरा करने के लिए काले तिल, पिंड खजूर का बीज निकालकर मिक्सर में पीस लें। नींबू के आकार का लड्डू बनाकर रोज सुबह खाना चाहिए। शरीर में तकलीफ ज्यादा हो तो डॉक्टरी सलाह पर शाम को भी ले सकते हैं। इसे खाने का सबसे अच्छा समय नवंबर, दिसंबर, जनवरी और फरवरी माह होता है। शतावरी एस्ट्रोजन से भरपूर होता है। इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

कोशिकाओं को जल्दी खत्म होने से बचाता है सोयाबीन –
महिला को सोयाबीन अधिक खाना चाहिए। सोयाबीन शरीर की कोशिकाओं को जल्दी खत्म होने से बचाता है और खून में कोलेस्ट्रॉल का स्तर संतुलित रखता है। नियमित खानपान में गाजर, पालक, टमाटर, आंवला, पपीता और अखरोट शामिल करने चाहिए।

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