समाचार सच, हल्द्वानी। ग्राम्य विकास विभाग के प्रशिक्षण केंद्र के भीतर युवक का शव रहस्यमय परिस्थितियों में फांसी के फंदे में झूलता मिला। इससे क्षेत्र में जहां सनसनी फैल गई। वहीं पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। पुलिस ने शव को फंदे से उताकर कर कब्जे में ले लिया और साक्ष्य जुटाए। मामले की छानबीन शुरू कर दी गई है। शव का पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। बागजाला, गौलापार में ग्राम्य विकास विभाग का प्रचार प्रशिक्षण केंद्र भवन है। जिसे इन दिनों कोविड के कार्यों के मद्देनजर सैक्टर मजिस्ट्रेट, चिकित्सकों व पुलिस कर्मियों के लिए आरक्षित किया गया है। बताया जाता है कि शनिवार की प्रातः इस भवन की बिल्डिंग के एक कमरे में युवक का शव मफलर के सहारे पंखे के कुंडे से झूलता मिला। इस सूचना से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। जब यह सूचना पुलिस को मिली तो हड़कंप मच गया। आनन-फानन में पुलिस क्षेत्राधिकारी भूपेंद्र सिंह धौनी, खेड़ा चौकी प्रभारी कृपाल सिंह दलबल के साथ मौके पर पहुंच गये। पुलिस ने शव को फंदे से उतारा और घटनास्थल का जायजा लेकर साक्ष्य जुटाए। खेड़ा चौकी प्रभारी कृपाल सिंह के अनुसार मृतक के पास से बैंक पास बुक व 330 रूपये की नगदी बरामद हुई है। पासबुक के आधार पर मृतक की शिनाख्त काफलीगैर बागेश्वर निवासी 27 वर्षीय राजेंद्र सिंह पुत्र बच्ची सिंह के रूप में की गई है। इस बीच पुलिस ने दूरभाष पर घटना की सूचना मृतक के परिवारजनों को दी। परिवारजनों ने बताया कि मृतक अल्मोड़ा में किसी खड़िया फैक्ट्री में वाहन चालक था। वह तीन दिन से लापता था। उसकी ढूंढखोज की जा रही थी। प्रशिक्षण केंद्र में मृतक कब और कैसे आया, इसका किसी को पता नहीं है। पुलिस का कहना है कि प्रत्येक बिन्दु को ध्यान में रखकर मामले की जांच की जा रही है। पुलिस ने शव का पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मौत के सही कारणों का पता लगाने के लिए पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने का इंतजार कर रही है।
हल्द्वानी। ग्राम्य विकास विभाग का प्रचार प्रशिक्षण केंद्र भवन में युवक का शव लटका मिलने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कमरे में शव लटका होने के बावजूद किसी तो यह तक नहीं पता कि मृतक कब, कैसे और कहां से भवन में दाखिल हुआ। उसके पीछे के रास्ते भवन में प्रवेश करना बताया जा रहा है। जबकि इस भवन को कोविड में लगे कर्मचारियों व अधिकारियों के लिए आरक्षित किया गया है। रात्रि के समय भवन के समस्त गेट बंद होने की बात भी सामने आ रही है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर मृतक भवन के अंदर दाखिल कैसे हो गया। यदि दाखिल हो भी गया तो इसकी खबर किसी को कैसे नहीं हुई?



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