74 दिन का इंतजार खत्म, अब सड़क पर उतरे लैब टेक्नीशियन! CM आवास कूच पर पुलिस ने रोका, कई हिरासत में

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समाचार सच, देहरादून। पिछले 74 दिनों से शांतिपूर्ण धरना दे रहे उत्तराखंड के डिग्रीधारी मेडिकल लैब टेक्नीशियनों का शुक्रवार को सब्र जवाब दे गया। सेवा नियमावली लागू करने, रिक्त पदों पर भर्ती शुरू करने और निजीकरण पर रोक लगाने की मांग को लेकर बड़ी संख्या में लैब टेक्नीशियन गांधी पार्क से मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच कर गए। हालांकि हाथीबड़कला में पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया, जिसके बाद मौके पर तीखी नोकझोंक और नारेबाजी हुई। बाद में कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर एकता विहार धरना स्थल पहुंचा दिया गया।

मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट संघ उत्तराखंड के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में लैब टेक्नीशियनों के अलावा रेडियोलॉजी टेक्नीशियन, ऑप्टोमेट्रिस्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, ओटी टेक्नीशियन सहित एलाइड हेल्थ साइंस से जुड़े अन्य स्वास्थ्य कर्मियों ने भी भाग लेकर आंदोलन को समर्थन दिया।

संघ के महासचिव मयंक राणा ने कहा कि राज्य गठन के 26 वर्ष बाद भी मेडिकल लैब टेक्नीशियन संवर्ग की सेवा नियमावली लागू नहीं हो सकी है। प्रशिक्षित और पंजीकृत होने के बावजूद हजारों युवा सरकारी नौकरी से वंचित हैं। उन्होंने आईपीएचएस मानकों के अनुरूप नए पदों के सृजन, लंबित सेवा नियमावली लागू करने और रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती शुरू करने की मांग की। साथ ही सरकारी अस्पतालों की लैब सेवाओं के निजीकरण और आउटसोर्सिंग का भी विरोध किया।

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एक्स-रे टेक्नीशियन संवर्ग के डॉ. गौतम रतूड़ी ने कहा कि पैरामेडिकल क्षेत्र के विभिन्न तकनीशियनों को सरकार ने आईपीएचएस मानकों को लागू करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

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संघ के अध्यक्ष आशीष चंद्र ने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन के बावजूद सरकार उनकी न्यायोचित मांगों की लगातार अनदेखी कर रही है। इससे प्रदेशभर के बेरोजगार डिग्रीधारी मेडिकल लैब टेक्नीशियनों में गहरा आक्रोश है।

प्रमुख मांगें
-आईपीएचएस मानकों के अनुरूप मेडिकल लैब टेक्नीशियनों के नए पद सृजित किए जाएं।
-सेवा नियमावली लागू कर वर्षवार मेरिट के आधार पर नियमित एवं पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए।
-भर्ती में देरी के कारण आयु सीमा पार कर चुके अभ्यर्थियों को एकमुश्त आयु सीमा में छूट दी जाए।
-सरकारी अस्पतालों की लैब सेवाओं के निजीकरण और आउटसोर्सिंग पर तत्काल रोक लगाई जाए।

संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और उग्र तथा व्यापक बनाया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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