समाचार सच, नई दिल्ली। नीट पेपर लीक आंदोलन और जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान उनके और उनकी दिवंगत माता के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया, जिससे उन्हें पीड़ा पहुंची। हालांकि उन्होंने नाराजगी जताने के बजाय छात्रों को “गुमराह बच्चे” बताते हुए उन्हें माफ करने और सही दिशा दिखाने की अपील की।
शुक्रवार देर रात जारी वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि समाज में बढ़ते आक्रोश को वह समझते हैं, लेकिन इसका समाधान अपशब्द या नफरत नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि यह चिंता का विषय है कि देश की बेटियां भी इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रही हैं, जिसे उन्होंने “सांस्कृतिक झटका” बताया।
मोदी ने कहा कि किसी भी गलती का जवाब केवल सजा नहीं हो सकता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि गलती से दांत जीभ को काट ले, तो कोई दांत नहीं तोड़ता, क्योंकि दोनों अपने ही हैं। उसी तरह, भटके हुए बच्चे भी समाज का हिस्सा हैं और उन्हें दंडित करने के बजाय समझाने की जरूरत है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अदालतों और सजा से ज्यादा जरूरी है कि युवाओं को सकारात्मक दिशा दी जाए। उन्होंने छात्रों से देश के विकास में भागीदार बनने, नई चीजें सीखने और अपनी गलतियों से सबक लेकर आगे बढ़ने का आह्वान किया।
गौरतलब है कि नीट पेपर लीक मामले को लेकर जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन 20 जून से शुरू हुआ था, जो 36 दिनों तक चला। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार द्वारा प्रमुख मांगें स्वीकार किए जाने के बाद 25 जुलाई को आंदोलन समाप्त हुआ। इस आंदोलन को देशभर के हजारों छात्रों के साथ कई विपक्षी दलों का भी समर्थन मिला।

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