पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच के आसपास जबरन मंदिर निर्माण का प्रयास बर्दाश्त योग्य नहीं: तिवारी

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समाचार सच, हल्द्वानी। पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच के संस्थापक सदस्यों एवं पदाधिकारियों ने कहा कि कुछ तथाकथित असामाजिक तत्वों द्वारा मंच परिसर के आसपास जबरन शिव मंदिर का निर्माण कराने का प्रयास किया जा रहा है। जो कतई बर्दाश्त करने योग्य नहीं है।

रविवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए संस्थापक सदस्यों ने कहा कि उत्थान मंच परिसर में न्याय देवता गोलज्यू का वर्षों से मंदिर स्थापित किया गया है और वही मंदिर यहां पर रहेगा। उसके इर्द-गिर्द शिव मंदिर बनाया जाना औचित्यहीन है। पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच के अध्यक्ष डॉक्टर चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि गोलज्यू मंदिर के आसपास शिव मंदिर का निर्माण किया जाना एक प्रकार से किसी न्यायाधीश के अगल बगल में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री को बैठाने जैसा है। जो कि असंभव है। उन्होंने कहा हमारे पर्वतीय समाज व संस्कृति में कहीं भी गोलज्यू मंदिर के अगल-बगल शिव मंदिर का निर्माण नहीं किया गया है। शिव मंदिर हमेशा घाटियों व नदी तट पर में ही स्थापित होता है।

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संस्था के संस्थापक सदस्य एडवोकेट हुकुम सिंह कुंवर ने कहा कि कुछ लोग जबरदस्ती मंच के साथ छेड़छाड़ करने और देश भाव पूर्ण रवैया अपनाने की कोशिश कर रहे हैं। जबकि पिछले 40 सालों से उत्थान मंच पर्वतीय समाज की संस्कृति को एकजुट कर संजोए हुए हैं। उन्होंने कहा हर कोई समाज अपने अपने समाज का गठन कर उसे अपने तरीके से संचालित कर रहा है। ऐसे में पर्वतीय उत्थान मंच की तरफ से कहीं भी कोई आपत्ति छेड़छाड़ दर्ज नहीं की गई।

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पर्वतीय उत्थान मंच को अनावश्यक रूप से छेड़छाड़ करने वालों को किसी भी कीमत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा पूर्व की भांति पर्वतीय उत्थान मंच में इस बार भी उत्तरायणी कौतिक धूमधाम से मनाया जायेगा। इसके अलावा समय-समय पर विभिन्न प्रकार के आयोजनों का क्रम भी जारी रहेगा।

पत्रकार वार्ता के दौरान संस्था के आय-व्यय निरीक्षक एलडी पांडे, महामंत्री मुकेश शर्मा, संरक्षक भुवन जोशी, संस्था सदस्य एन बी गुणवंत, हेमंत सिंह बगड़वाल, गोपाल बिष्ट, बीडी पाठक, लीलाधर पाण्डे, राजेन्द्र बिष्ट, मोहन पाठक, नीरज पंत, देवेन्द्र तोलिया, त्रिलोक बनौली, चन्द्रशेखर परगाई, शोभा बिष्ट, सरोज बिष्ट, बिमला सागुणी, रत्ना श्रीवास्तव, पुष्पा सम्मल, पुष्पा नेगी, मुन्नी सुयाल समेत संस्था से जुड़े दर्जनों लोग मौजूद थे।

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