समाचार सच, हल्द्वानी। पर्यावरणविद एवं पूर्व जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉ. आशुतोष पंत ने लोगों से विश्व पर्यावरण दिवस पर केवल औपचारिकता के तौर पर पौधरोपण करने के बजाय मानसून आने के बाद पौधे लगाने की अपील की है। उनका कहना है कि जून माह की भीषण गर्मी में लगाए गए अधिकांश पौधे जीवित नहीं रह पाते, जिससे पौधरोपण अभियान का उद्देश्य अधूरा रह जाता है।
जारी बयान में डॉ. पंत ने कहा कि 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सरकारी और गैर-सरकारी स्तर पर बड़ी संख्या में पौधे लगाए जाते हैं, लेकिन उनके 38 वर्षों के अनुभव के अनुसार सार्वजनिक स्थलों पर लगाए गए पौधों में से बहुत कम पौधे ही जीवित बच पाते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत में जून के दौरान तापमान कई स्थानों पर 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, ऐसे में तपती धरती पर लगाए गए पौधों का संरक्षण बेहद कठिन हो जाता है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल पौधरोपण तक सीमित नहीं है। विश्व पर्यावरण दिवस को सार्थक बनाने के लिए पॉलीथिन के उपयोग को रोकने, जल एवं बिजली संरक्षण का संदेश देने, स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाने, नुक्कड़ नाटकों के आयोजन, बच्चों की चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिताएं कराने तथा जंगलों को आग से बचाने जैसे अनेक रचनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं।
डॉ. पंत ने सवाल उठाया कि यदि पिछले वर्षों में लगाए गए पौधों की स्थिति का आकलन किया जाए तो वास्तविक तस्वीर सामने आ जाएगी। उन्होंने कहा कि केवल फोटो खिंचवाने या औपचारिकता निभाने के लिए पौधे लगाना उचित नहीं है। पौधरोपण तभी सार्थक माना जाएगा जब पौधे सही मौसम में लगाए जाएं और उनकी नियमित देखभाल की जाए।
उन्होंने बताया कि वन्यजीवों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उन्हें वन विभाग से अनुमति मिल चुकी है और अगले कुछ दिनों में जंगल क्षेत्रों में 150 लीटर क्षमता की 20 सीमेंट निर्मित नांद स्थापित की जाएंगी, ताकि गर्मी के मौसम में जंगली जानवरों को पानी उपलब्ध हो सके।
डॉ. पंत ने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस की अवधारणा भले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तय की गई हो, लेकिन स्थानीय जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रमों की रूपरेखा बनाई जानी चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि मानसून आने के बाद अधिक से अधिक पौधे लगाएं और कम से कम तीन वर्षों तक उनकी देखभाल की जिम्मेदारी भी निभाएं। तभी पर्यावरण संरक्षण के प्रयास वास्तव में सफल और प्रभावी साबित होंगे।



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