श्रीसंवत २०८० श्रीशाके १९४५ श्री सूर्य दक्षिणायन हेमन्त ऋतु धनार्क २ गते मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि रविवार सूर्योदय ७/६ बजे सूर्यास्त ५/१३ बजे राहु काल ४/३० से ६ बजे तक अभिजीत मुहूर्त दिन में ११/५० बजे से १२/२८ बजे…


श्रीसंवत २०८० श्रीशाके १९४५ श्री सूर्य दक्षिणायन हेमन्त ऋतु धनार्क २ गते मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि रविवार सूर्योदय ७/६ बजे सूर्यास्त ५/१३ बजे राहु काल ४/३० से ६ बजे तक अभिजीत मुहूर्त दिन में ११/५० बजे से १२/२८ बजे…

श्रीसंवत २०८० श्रीशाके १९४५ श्रीसूर्य दक्षिणायन हेमन्त ऋतु धनार्क १ गते पौष मास चान्द्रमास से मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि शनिवार सूर्योदय ७/५ बजे सूर्यास्त ५/१३ बजे राहु काल ९ बजे से १०/३० बजे तक अभिजीत मुहूर्त दिन में ११/५०…

समाचार सच, हल्द्वानी। सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज (Satguru Mata Sudiksha Ji Maharaj) एवं राज पिता रमित जी की हजूरी में हल्द्वानी एमबीइंटर कॉलेज खेल मैदान में विशाल संत समागम का आयोजन किया गया। जिसमें सद्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज…

श्रीसंवत २०८० श्री शाके १९४५ श्रीसूर्य दक्षिणायन हेमन्त ऋतु वृश्चिकार्क २९ गते मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि शुक्रवार सूर्योदय ७/४ बजे सूर्यास्त ५/१२ बजे राहु काल १०/३० से१२ बजे तक अभिजीत मुहूर्त दिन में ११/५० बजे से १२/२८ बजे तक।…

समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। सूर्य के धनु राशि में प्रवेश से एक माह के लिए खरमास का प्रारंभ हो जाता है। 16 दिसंबर 2023 शनिवार से खरमास प्रारंभ हो रहा है। उल्लेखनीय है कि खर का अर्थ होता है गधा…

समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। (देहरादून)। डॉ0 आचार्य सुशांत राज ने जानकारी देते हुये बताया की खरमास का आरंभ 16 दिसंबर से होगा और यह 15 जनवरी को मकर संक्रांति पर समाप्त हो जाएगा। खरमास में शादी, विवाह, मुंडन और गृघ्ह…

समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। हिंदू शास्त्रों में किसी भी शुभ और मांगलिक कार्य को शुभ मुहूर्त में करने की परंपरा है. बता दें कि देवउत्थान एकादशी से मांगलिक कार्यों की शुरुआत हुई थी और 15 दिसंबर के बाद इस पर…

समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। सर्दियों के मौसम में अमरूद की बहार आ जाती है। ये फल खाने में जितना स्वादिष्ट है, सेहत के लिए भी उतना ही गुणकारी होता है। विंटर में लोग तेल मसालेदार चीजें खाना काफी पसंद करते…

समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। शास्त्रानुसार देवशयनी एकादशी से देवप्रबोधिनी एकादशी तक चार माह विवाह का निषेध होता है किंतु केवल इन चार महीनों में ही विवाह का निषेध नहीं होता अपितु गुरु-शुक्रास्त, खरमास, होलिकाष्टक एवं पौष मास की अवधि में…