5 अक्टूबर को मनाया जाएगा दशहरा – डॉक्टर आचार्य सुशांत राज समाचार सच, अध्यात्म (देहरादून)। डॉक्टर आचार्य सुशांत राज ने जानकारी देते हुये बताया की दशहरा को विजयदशमी, आयुधपूजा के नाम से भी जाना जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार…


5 अक्टूबर को मनाया जाएगा दशहरा – डॉक्टर आचार्य सुशांत राज समाचार सच, अध्यात्म (देहरादून)। डॉक्टर आचार्य सुशांत राज ने जानकारी देते हुये बताया की दशहरा को विजयदशमी, आयुधपूजा के नाम से भी जाना जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार…

श्रीसंवत २०७९ श्रीशाके १९४४ सूर्य दक्षिणायन शरद ऋतु कन्यार्क आश्विन मास शुक्ल अष्टमी तिथि १७ गते आज महादुर्गाष्टमी व्रत होगा सूर्याेदय ६/११ बजे सूर्यास्त ५/५३ बजे राहु काल ७/३० बजे से ९ बजे तक अभिजीत मुहूर्त दिन में ११/५८ से…

समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। अनेक लोगों का पूरा जीवन किराये के मकान में बीत जाता है। वे अपना एक छोटा सा जमीन का टुकड़ा खरीदने के लिए जीवनभर कड़ा परिश्रम करते रहते हैं। किंतु फिर भी स्वयं का मकान नहीं…

समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। नवरात्रि के आठवें दिन महागौरी की पूजा की जाती है,महागौरी मां दुर्गा का आठंवा रूप हैं। महागौरी की चार भुजाएं हैं। इनका वाहन वृषभ है। इनके ऊपर के दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले…

3 अक्टूबर दिन सोमवार को पड़ रही महाअष्टमी: डॉक्टर आचार्य सुशांत राज समाचार सच, अध्यात्म (देहरादून) डॉ0 आचार्य सुशांत राज ने जानकारी देते हुये बताया की शारदीय नवरात्रि में अष्टमी तिथि का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन महागौरी…

श्रीसंवत २०७९ श्रीशाके १९४४ सूर्य दक्षिणायन शरद ऋतु कन्यार्क आश्विन मास शुक्ल सप्तमी तिथि १६ गते आज सायं काल में माता कालरात्रि देवी की पूजा होती है सूर्याेदय ६/११ सूर्यास्त ५/५४ बजे राहु काल ४/३० बजे से ६ बजे तक…

समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। नवरात्री का सातवां दिन माता को खुश करने के लिए कई तांत्रिक उपाय भी किये जाते हैं। माँ कालरात्रि माँ दुर्गा का सातवां स्वरूप है। जो काफी भयंकर है। इनके शरीर का रंग काला है। मां…

श्रीसंवत २०७९ श्रीशाके १९४४ सूर्य दक्षिणायन शरद ऋतु कन्यार्क आश्विन शुक्ल पक्ष षष्ठी तिथि गते १५गते आज माता कात्यायनी देवी की पूजा की जाती है । सूर्योदय ६/१० बजे सूर्यास्त ५/५६ बजे राहु काल ९बजे से १०/३०बजे तक अभिजीत मुहूर्त…

समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। सिद्ध कुंजिका स्तोत्र को परम कल्याणकारी माना गया है, क्योंकि इसका पाठ करने से मनुष्य को चमत्मकारिक रूप से कष्टों से मुक्ति मिलती है और उसकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यह स्तोत्र श्रीरुद्रयामल के मन्त्र से…