हनुमान चालीसा के बाद भक्तों को मिला प्रकृति बचाने का संदेश! 400 से अधिक श्रद्धालुओं को बांटे फलदार पौधे

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कटहल, अमरूद और तेजपत्ता के पौधे लेकर घर पहुंचे हनुमान भक्त, पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प

समाचार सच, काठगोदाम/हल्द्वानी।
आस्था और पर्यावरण संरक्षण का एक अनूठा संगम काठगोदाम के शीशमहल स्थित रामलीला मैदान में देखने को मिला। यहां प्रत्येक मंगलवार आयोजित होने वाले संगीतमय हनुमान चालीसा पाठ के बाद 400 से अधिक श्रद्धालुओं के बीच फलदार पौधों का वितरण किया गया। भक्तों को उनकी इच्छा के अनुसार कटहल, अमरूद और तेजपत्ता के पौधे भेंट किए गए और उनसे इन्हें घरों में लगाकर उनकी देखभाल करने का आग्रह किया गया।

कार्यक्रम वर्षों से समाजसेवी पंकज खत्री द्वारा चलाए जा रहे धर्मजागरण कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित किया गया। पर्यावरण प्रेमी श्रीमती आनंदी नेगी के आग्रह पर पर्यावरणविद एवं पूर्व जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉ. आशुतोष पन्त से संपर्क कर श्रद्धालुओं के लिए पौधों की व्यवस्था की गई।

रामलीला मैदान में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने पहले हनुमान चालीसा का सुंदर संगीतमय पाठ किया। पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। इसके बाद कार्यक्रम ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए एक नई दिशा ली और उपस्थित लोगों को पौधे भेंट किए गए।

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“धरती को हरा-भरा बनाना हम सबकी जिम्मेदारी”
डॉ. आशुतोष पन्त ने उपस्थित जनसमूह से पॉलीथीन का प्रयोग कम करने और अधिक से अधिक पेड़ लगाने की अपील की। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, पर्याप्त पानी और बेहतर पर्यावरण देना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने लोगों से केवल पौधे लगाने तक सीमित न रहने बल्कि पौधों को बड़ा होने तक उनकी देखभाल करने का भी संकल्प लेने का आह्वान किया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने और पौधरोपण करने का संकल्प लिया।

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इस वर्ष का 97वां पौध भेंट कार्यक्रम
डॉ. आशुतोष पन्त ने बताया कि 8 सितंबर को आयोजित यह उनका वर्ष 2026 का 97वां पौध भेंट कार्यक्रम था। इससे पहले सप्ताह के दौरान हरिद्वार के गेंदीखाता, नए राजकीय मेडिकल कॉलेज, ऋषिकुल आयुर्वेद कॉलेज और बहादराबाद के साथ ही देहरादून के दुधली गांव तथा भारतीय चिकित्सा परिषद परिसर में भी पौध वितरण और पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।

काठगोदाम में आयोजित इस कार्यक्रम ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि धर्म और प्रकृति संरक्षण एक-दूसरे से अलग नहीं, बल्कि जीवन को सुरक्षित और समृद्ध बनाने की साझा जिम्मेदारी हैं।

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