समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। 1. भवन में जल ईशान, पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर से प्रवेश करना चाहिए तथा भवन से जल इन्हीं दिशाओं से ही बाहर जाना चाहिए।
- भवन का दक्षिणी एवं पश्चिमी भाग उत्तर एवं पूर्वी भाग से अधिक ऊंचा होना चाहिए, तथा उत्त एवं पूर्वी भाग में अधिक खुला स्थान होना चाहिए।
- भवन में रसोईघर आग्नेय कोण में बनवाना चाहिए तथा मेन स्विच तथा अग्नि से संबंधित सभी उपकरण आग्नेय कोण में होने चाहिए।
- भवन में वायु का आगमन प्रवाह वायव्य कोण से होना चाहिए। इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह भवन में होने लगता है। भवन में वायु के लिए द्वार एवं खिड़कियों सदैव सम संख्या में बनवायें।
- भवन के फर्श की ढाल पूर्व, उत्त अथवा ईशान कोण में होना चाहिए। दक्षिणी पश्चिमी भाग, उत्तर-पूर्वी भाग से भारी होना चाहिए।
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