आरटीआई से उठे सवालों पर जांच ने खोली परतें, मंदिर कोष से भुगतान पर शासन सख्त, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश
समाचार सच, देहरादून। उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम से जुड़ा वीआईपी खर्च विवाद अब गंभीर प्रशासनिक कार्रवाई की ओर बढ़ गया है। श्रद्धालुओं की आस्था और मंदिर कोष के उपयोग को लेकर उठे सवालों के बीच बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) की जांच में वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि हुई है। जांच रिपोर्ट शासन को सौंपे जाने के बाद उत्तराखंड सरकार ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए हैं।
यह मामला उस समय सुर्खियों में आया था, जब सूचना के अधिकार (आरटीआई) के जरिए कुछ दस्तावेज सार्वजनिक हुए। इन दस्तावेजों में आरोप लगाया गया था कि केदारनाथ धाम पहुंचे कुछ वीआईपी मेहमानों के आवास और भोजन का खर्च मंदिर समिति के कोष से वहन किया गया। आरोपों में भाजपा प्रदेश सचिव नेहा जोशी और केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल के नाम भी सामने आए थे। हालांकि दोनों नेताओं ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि उन्होंने अपने निजी खर्च का भुगतान स्वयं किया था।
विवाद बढ़ने पर बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने चार सदस्यीय जांच समिति गठित की। समिति ने भुगतान संबंधी अभिलेखों, बिलों और वित्तीय दस्तावेजों की जांच की। रिपोर्ट में सामने आया कि कुछ मामलों में विशिष्ट अतिथियों के आवास और भोजन के बिल मंदिर समिति के माध्यम से चुकाए गए तथा भुगतान प्रक्रिया में निर्धारित वित्तीय नियमों का पूर्ण पालन नहीं किया गया।
बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि जांच पूरी कर रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है और अब शासन के निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
25 जून 2026 को पर्यटन एवं धर्मस्व विभाग की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट कहा गया कि प्रथम दृष्टया मंदिर कोष से अग्रिम धनराशि बिना सक्षम स्वीकृति के जारी की गई, जो वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आती है। शासन ने तत्कालीन व्यवस्थापक केदारनाथ, तत्कालीन मुख्य प्रभारी अधिकारी और तत्कालीन मुख्य कार्याधिकारी की भूमिका की जांच करते हुए बीकेटीसी अधिनियम 1939 के तहत नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
केदारनाथ धाम में हर वर्ष लाखों श्रद्धालु अपनी श्रद्धा से करोड़ों रुपये का दान और चढ़ावा अर्पित करते हैं। ऐसे में यदि मंदिर कोष का उपयोग निर्धारित नियमों से हटकर किया गया है, तो यह केवल वित्तीय मामला नहीं बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास से भी जुड़ा मुद्दा बन गया है।
जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद धार्मिक संगठनों और आम श्रद्धालुओं के बीच भी पारदर्शिता की मांग तेज हो गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
बीकेटीसी का कहना है कि भविष्य में मंदिर कोष के उपयोग में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी।



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