समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। भारतीय परंपरा में घर-आंगन की सफाई को विशेष महत्व दिया गया है। दुकानदार सुबह अपनी दुकान के आगे स्वयं पानी डाल कर प्रवेश द्वार को साफ करते थे। घर के आंगन को सुबह साफ किया जाता था। घर में प्रवेश से पहले जूते उतारकर, हाथ-पैर धोकर ही अंदर आते थे। स्वच्छता का संबंध हमारे शारीरिक ही नहीं, मानसिक स्वास्थ्य से भी है। वास्तु शास्त्र के अनुसार साफ-सफाई से भवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचरण होता है। वहीं, गंदगी, कबाड़ को घर में एकत्रित करने से नकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
- घर की छत पर कबाड़ रखने से मानसिक तनाव की स्थितियां और सिर दर्द की समस्या बनी रहती है। यदि कबाड़ या भारी सामान रखना ज्यादा जरूरी हो तो उसे छत के दक्षिण-पश्चिम कोने में रखना चाहिए।
- घर के चारों तरफ या छत पर गमलों में ऐसे पेड़-पौधे लगाने चाहिए जिससे छत पर छाया बनी रहे। ध्यान रखें कि पेड़-पौधे कांटे वाले नहीं होने चाहिए।
- घर में कबाड़ या अन्य गैर जरूरी सामान के लिए दक्षिण-पश्चिम कोने में स्टोर रूम बनवाना चाहिए। गैर जरूरी सामान उसी स्टोर में रखें।
- वास्तु के मुताबिक रसोई हमेशा साफ-सुथरी होनी चाहिए। जूठे बर्तनों को ज्यादा देर न रखें। कोशिश करें कि उन्हें जल्द से जल्द साफ कर दें। जूठे बर्तनों में बैक्टीरिया पनपने लगते हैं और वास्तु दोष में भी वृद्धि होती है।
- यदि घर का प्लास्टर टूट रहा हो, तो उसे ठीक करायें। घर कितना भी पुराना हो किन्तु समय-समय पर रंग-रोगन व मरम्मत कराते रहना चाहिए। ऐसा करने से घर की सकारात्मक ऊर्जा जिंदा रहती है।
- जूते-चप्पलों में गंदगी सबसे ज्यादा होती है। जूते-चप्पल निकालकर, हाथ-पैर धोकर ही घर में प्रवेश करना चाहिए। कोशिश करें कि जूते-चप्पल घर के बाहर या किसी बंद अलमारी में रखें।
- घर के शौचालय का दरवाजा हमेशा बंद रखें, ताकि वहां से निकलने वाली नकारात्मक ऊर्जा पूरे घर में अपना असर न डाल सके।
- सप्ताह में कम से कम एक बार समुद्री नमक डालकर पूरे घर में पोंछा अवश्य लगायें।
- दरवाजे या खिड़की को खोलते समय कोई आवाज आती हो, तो उसे ठीक करायें। ध्यान रखें कि घर में मकड़ी जाला न बनाने पाये।
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