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जानें किस उम्र में कौन सा ग्रह आपको देगा शुभ फल

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समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। हमारी कुंडली से जुड़े तमाम ग्रह और नक्षत्रों का प्रभाव हमारे जीवन में पड़ता है। आइए जानते हैं कि कौन सा ग्रह कितने वर्ष की आयु में अपना प्रभाव दिखायेगा। जैसे यदि जातक की कुंडली में सूर्य सातवें भाव में स्थित है, तो वह 22 वर्ष की उम्र में अपना प्रभाव दिखायेगा। ऐसे में सूर्य के प्रभाव से जातक के सरकारी कामों में विघ्न आदि उत्पन्न हो सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं सभी ग्रहों के प्रभावों के बारे में –
सूर्य-
सूर्य ग्रह जातक के जीवन में 22 वर्ष की आयु में अपना प्रभाव दिखाता है। सूर्य एक पुरुष ग्रह है और इसका प्रभावी समय दिन का होता है। यदि कुंडली सूर्य उच्च का है और शुभ है तो जातक को पिता एवं सरकारी क्षेत्र से लाभ प्राप्त होता है और यदि यह नीच अवस्था में है, तो यह विपरीत परिणाम दिखायेगा।

चंद्र-
चंद्र ग्रह का प्रभाव जातक के जीवनकाल में 24वें वर्ष में पड़ता है। चंद्र स्त्री ग्रह है और इसका प्रभावी समय रात्रिकाल होता है। यदि चंद्र शुभ हो और उच्च का हो तो जातक को माता की तरफ से प्रेम और सांसारिक भौतिक सुखों में वृद्धि होती है। परन्तु यदि यह विपरीत होगा तो अशुभ परिणाम दिखायेगा।

मंगल-
मंगल ग्रह का प्रभाव व्यक्ति के जीवनकाल के 28वें वर्ष में पड़ता है। मंगल एक क्षत्रिय और पुरुष ग्रह है। इसका प्रभावी समय दिन में होता है। यदि यह व्यक्ति के जीवन में शुभ होगा तो उसे जमीन-जायदाद और संपत्ति आदि में वृद्धि देगा।

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बुध –
यह ग्रह 34 वर्ष की उम्र में जातक पर अपना प्रभाव दिखाता है। बुध नपुंसक ग्रह है और इसका प्रभावी समय सुबह और शाम का होता है। यदि यह जातक की कुंडली में शुभ है तो जातक को व्यवसाय और नौकरी के क्षेत्र में लाभ देता है, परन्तु यदि यह विपरीत हो तो व्यक्ति को इन्हीं क्षेत्रों में हानि देगा।

बृहस्पति-
इस ग्रह को गुरु भी कहा जाता है। बृहस्पति ग्रह का संबंध जातक की शिक्षा और संस्कारों से है। इसका प्रभाव जातक पर 16 वर्ष की उम्र में पड़ता है। यह एक पुरुष ग्रह है और इसका प्रभावी समय दिन का होता है। यदि जातक की कुंडली में यह ग्रह शुभ है, तो शिक्षा और संस्कारों मे वृद्धि होगी। परन्तु यदि यह अशुभ हुआ तो जातक को उक्त क्षेत्रों में हानि देगा अर्थात यही जातक के सुधरने और बिगड़ने का समय होता है। यदि गुरु की स्थिति शुभ हुई तो जातक उच्च शिक्षा के साथ-साथ अच्छे संस्कारों वाला होता है।

शुक्र-
शुक्र ग्रह जातक के जीवन में 25 वर्ष की आयु में अपना प्रभाव दिखाता है। यह एक स्त्री ग्रह है और इसका प्रभावी समय रात्रिकाल है। इसका संबंध जातक की कुंडली में जीवनसाथी और प्रेम से है। यदि यह उच्च का और शुभ है तो जातक को जीवनसाथी से भरपूर प्रेम मिलता है और भौतिक सुखों में वृद्धि होती है। इसका नीच अवस्था में स्थित होना ठीक इसके विपरीत फलदायी होता है।

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शनि-
शनि का प्रभाव जातक के जीवन में 36 वर्ष की आयु में पड़ता है। यह एक नपुंसक ग्रह है और इसका प्रभावी समय सुबह और शाम का होता है। यदि यह जातक की कुंडली में शुभ अवस्था में होता है तो जातक को दुकान शासन आदि से सम्बंधित लाभ होता है। शनि न्याय के देवता हैं, इसलिए यदि जातक की कुंडली में अशुभ हैं तो और भी विपरीत परिणाम देंगे।

राहु-
राहु एक नपुंसक ग्रह है और इसका प्रभावी समय सुबह और शाम दोनों का हैद्य यह जातक की उम्र के 42वें वर्ष में अपना प्रभाव दिखाता है । यह एक आकस्मिक ग्रह है। यदि यह शुभ है तो आपको राजा बना देगा और यदि यह अशुभ स्थिति में हैं तो रंक बना कर ही छोड़ता है।

केतु-
केतु जातक की 46 वर्ष की आयु में अपना प्रभाव दिखाता है। यह एक नपुंसक ग्रह है और इसका प्रभावी समय सुबह और शाम का होता है। यदि यह जातक की कुंडली में शुभ है तो संतान और ननिहाल की तरफ से जातक को लाभ प्राप्त होता है और यदि यह अशुभ है तो इन्हीं क्षेत्रों से हानि मिलती है।

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