हिमाचल की तर्जं पर उत्तराखंड में भी अब नई हाइड्रो पावर पॉलिसी, धामी कैबिनेट ने लगायी मुहर

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-उत्तराखंड के स्कूलों में कक्षा 1 से 12 तक के छात्रों को मिलेगी निशुल्क किताब

-सरकार के इस निर्णय से 15 लाख से अधिक बच्चों को लाभ मिलेगा,

-एक प्रति मेगावाट के लिए शुल्क एक लाख लिया जाएगा, पहले 25 लाख रुपये थी

समाचार सच, देहरादून। हिमाचल की भांति उत्तराखंड में भी नई हाइड्रो पावर पॉलिसी लायी गई है। अब 25 लाख की जगह एक लाख रुपये में यह पर मेगावाट लेने की सुविधा मिलेगी। सरकार इसे विकास परक नीति के तहत देख रही है। इसके साथ ही उत्तराखंड के स्कूलों में 1 से 12 वीं कक्षा के सभी छात्रों को निशुल्क किताब दी जाएगी।

मंगलवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मंत्रिमंडल में उत्तराखंड नवीनतम जलविद्युत नीति, 2022 संशोधन पर मुहर लगी। यह नीति हिमाचल की तर्ज पर बनाई गई है। अब 02-25 मेगावाट, 25-100 मेगावाट और 100 मेगावाट से अधिक की परियोजना को एक में किया गया है। तीनों को मर्ज कर एक नीति लाई गई है। पहले 25 लाख लाइसेंस इसका शुल्क था। अब इसे एक लाख प्रति मेगावट किया गया है। इसके तहत जब प्रोजेक्ट की कमीशनिंग हो जाएगी, तब से प्रोजेक्ट की शुरुआत मानी जाएगी। अब परियोजना अनुबंध अवधि वाणिज्यिक उत्पादन तिथि के पश्चात 40 वर्ष तक लागू रहेगी। जब तक अनुबंध प्रावधानों के पहले समाप्त नहीं किया गया हो।

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हिमाचल की तर्ज पर सरकार ने विकास को ध्यान में रखकर यह निर्णय लिया है। परियोजना के हस्तांतरण की सुविधा भी दी गई है। 40 साल का प्रोजेक्ट पहले एमयूओ के तिथि से लागू होता था। अब शेड्यूल कार्मिशियल तिथि से प्रारंभ किया है। परियोजना के खोदाई के समय नीति नहीं थी। अब परियोजना के खोदाई और उपयोग की अनुमति दी गई है। शुल्क कम करना अधिक से अधिक लोगों का उपयोग का मकसद है। 25 मेगावाट से नीचे की योजना को पावर परचेज यूपीसीयल की ओर से किया जाएगा। लंबित परियोजना के लिए वन टाइम स्कीम के तहत आवेदन कर सकता है। बिना विलंब शुल्क के सरकार आवेदन को स्वीकार करेगी। सरकार राज्य में भी जल विद्युत परियोजनाओं के विकास और निर्माण को बढ़ावा देना यह नीति लाने का मुख्य उद्देश्य है।

उत्तराखंड सरकार ने कक्षा 1 से लेकर 12वीं तक के सभी सरकारी और अर्ध सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को सरकार की मुफ्त किताबें वितरित करने का निर्णय लिया है।

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शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने बताया कि उनकी सरकार ने यह पहल समाज के सभी लोगों के लिए लागू होगी। इससे करीब 15 लाख से ज्यादा छात्र और छात्राओं को फायदा मिलेगा। उन्होंने बताया कि 12 बच्चे सरकारी स्कूलों में बढ़ते हैं। इसके अलावा 3 लाख से अधिक बच्चे और हैं। यानी 15 लाख से अधिक बच्चों को सरकार के इस निर्णय का लाभ मिलेगा। देश पहला राज्य उत्तराखंड है शिक्षा के उत्थान के लिए इस तरह का प्रयास किया है।

इसके अलावा मसूरी में आयोजित चिंतन शिविर से संबंधित 25 बिंदुओं का प्रस्तुतीकरण नियोजन विभाग के लिए किया गया है। जिस पर कैबिनेट ने अपनी सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की है। मुख्यमंत्री को अधिकृत किया गया है। इसमें प्रमुख रूप से नीति आयोग की तर्ज पर थिंक टैंक बनाना और उत्तराखंड में चिह्नित 15 स्थानों पर टाउनशिप को चरणबद्ध विकसित करना। इसके साथ ही सड़क सुरक्षा तंत्र, शिक्षकों की गुणवत्ता, फलों ,फूलों और सब्जियों का संवर्धन, योग संस्थान और प्रशिक्षण केन्द्रों का एनएबीएच के माध्यम से प्रत्यायन,ड्रोन स्कूलों की स्थापना करना सहित अन्य कार्य शामिल हैं।

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