हल्द्वानी उपकारागार में शिक्षा की नई रोशनी, उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय ने कैदियों को बांटी किताबें

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17 बंदियों ने लिया उच्च शिक्षा में प्रवेश, विश्वविद्यालय ने जेल लाइब्रेरी को भी दी 180 पुस्तकें

समाचार सच, हल्द्वानी। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय ने उपकारागार हल्द्वानी में बंद कैदियों को उच्च शिक्षा से जोड़ने की दिशा में एक सराहनीय और ऐतिहासिक पहल करते हुए शिक्षा की नई अलख जगाई है। विश्वविद्यालय के हल्द्वानी क्षेत्रीय केंद्र के अंतर्गत संचालित विशेष अध्ययन केंद्र के माध्यम से जेल में बंद बंदियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का अभियान लगातार आगे बढ़ रहा है।

इसी क्रम में 18 मई को उपकारागार हल्द्वानी में जनवरी 2026 सत्र में प्रवेश लेने वाले कैदियों के लिए पुस्तक वितरण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने की।

गौरतलब है कि इससे पहले जेल परिसर में आयोजित विशेष जागरूकता कार्यक्रम से प्रेरित होकर 17 कैदियों ने विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश लिया था। अब इन शिक्षार्थियों को अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई गई ताकि वे शिक्षा के माध्यम से अपने जीवन को नई दिशा दे सकें।

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कार्यक्रम में निदेशक क्षेत्रीय सेवाएं प्रो. गिरिजा पाण्डे ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रदेश के सुदूर, वंचित और उपेक्षित वर्गों तक उच्च शिक्षा पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा हर व्यक्ति का अधिकार है और इसी सोच के साथ अब जेल में बंद कैदियों तक भी शिक्षा पहुंचाई जा रही है।

निदेशक अकादमिक प्रो. पी डी पंत ने कहा कि समाज के उपेक्षित वर्गों तक उच्च शिक्षा पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है, लेकिन विश्वविद्यालय इस जिम्मेदारी को पूरी संवेदनशीलता के साथ निभा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कैदियों को शिक्षा उपलब्ध कराने में हर संभव सहायता दी जाएगी।

कुलसचिव डॉ. खेमराज भट्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग तक शिक्षा पहुंचाना है, चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने कहा कि शिक्षा जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने विश्वास जताया कि पढ़ाई के माध्यम से कैदी समाज की मुख्यधारा से जुड़कर भविष्य में बेहतर जीवन की ओर आगे बढ़ सकेंगे।

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उपकारागार अधीक्षक प्रमोद कुमार ने विश्वविद्यालय की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा से बंदियों के भीतर सकारात्मक सोच विकसित होगी और उनका भविष्य बेहतर बन सकेगा।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए सहायक क्षेत्रीय निदेशक रेखा बिष्ट ने बताया कि विशेष अध्ययन केंद्र के माध्यम से बंदियों को विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों में निःशुल्क प्रवेश दिया जा रहा है। उन्होंने आगामी जुलाई सत्र में प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी भी साझा की।

कार्यक्रम के अंत में कुलपति द्वारा जनवरी 2026 सत्र में पंजीकृत शिक्षार्थियों को पुस्तकें वितरित की गईं। साथ ही उपकारागार की लाइब्रेरी के लिए 180 पुस्तकें भी निःशुल्क उपलब्ध कराई गईं।

इस अवसर पर मधु डोगरा, नीलम धामी, अमित कुमार सहित विश्वविद्यालय एवं कारागार प्रशासन के अधिकारी, कर्मचारी और शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक बंदी मौजूद रहे।

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