On the martyrdom day of the four Sahibzads, storytellers enthralled the Sangat, thousands served langar

समाचार सच, हल्द्वानी। चारों साहिबजादों की शहीदी की याद में गुरमत समागम का आयोजन किया गया। संगत गुरुद्वारा चार साहिबजादें कालाढुंगी रोड में समागम के दौरान पन्थ के महान कीर्तनीय एवं कथावाचक ने संगत को कीर्तन एवं कथा द्वारा निहाल किया जिसमें दरबार साहिब से भाई गुरविन्दर सिंह जी, श्री आनन्दपुरी हजूरी रागी दरबार साहिब (अमृतसर) भाई मनजिंदर सिंह जी, हजूरी रागी श्री फतेहगढ़ साहिब (सरहन्द), भाई मनोहर सिंह जी (बरेली वाले), भाई सुखदेव सिंह जी हजूरी रागी श्री चार साहिबजादें (हल्द्वानी), कथा वाचक बाबा मान सिंह जी (बौंठा वाले) जी ने संगत को निहाल किया।
संगत के दौरान उन्होंने कथा के माध्यम से बताया कि श्री गोबिन्द सिंह जी के चार साहिबजादें एवं माता गुजरी जी के शहीदी दिवस का व्याख्यान करते हुए कहा कि हमें चारों साहिबजादों की शहीदी से स्वाभिमान और वीरता की प्रेरणा मिलती है। ऐसे में धर्म की रक्षा के लिए चारों साहिबजादों की शहादत को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। सिख समुदाय के अंतिम और दसवें गुरु गोविंद सिंह के चार पुत्रों ने धर्मरक्षा के लिए बलिदान दिया था। गुरु गोविंद सिंह के साहिबजादा अजीत सिंह, जोरावर सिंह, जुझार सिंह और फतेह सिंह ने मुगलों से धर्म को बचाने के लिए जमकर लोहा लिया। साहिबजादा अजीत सिंह और जुझार सिंह मुगलों के साथ युद्ध में शहीद हो गए थे। जबकि जोरावर सिंह और फतेह सिंह को वजीर खान ने दीवार में चिनवा दिया था।
संगत में मुख्य सेवादार अमनदीप सिंह, रविन्दरपाल सिंह सिब्बल, हरजीत सिंह सिब्बल, सुरिन्दर पाल सिंह, रविन्दर सिंह, लक्की, प्रिन्स, मंजीत सिंह, बलबीर सिंह, बबली, जया, रोजी प्रमुख थे।



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