समाचार सच, देहरादून। देहरादून मे 22 अक्टूबर से शुरू हो रही दुर्गा पूजा की तैयारियां जोरों से चल रही हैं। विभिन्न आयोजक समितियों की ओर से मंगाई गई सात प्रतिमा वाहनों से जरिए गत हफ्ते दून लाई गई हैं। गढ़ी कैंट स्थित दुर्गाबाड़ी में गाजियाबाद के मूर्तिकार इनके रंग रोगन की तैयारियों में लगे हैं। खास बात यह है कि इस बार भी इको फ्रेंडली मूर्तियां मंगवाई गई हैं। इन मूर्तियों में पुआल, मिट्टी, धान का छिलका, वॉटर पेंट और बांस का इस्तेमाल किया गया है।
इन दिनों दुर्गा के अलावा सरस्वती, लक्ष्मी, गणेश और कार्तिकेय की प्रतिमा के बाहरी परत पर कलकत्ता की मिट्टी का लेप किया जा चुका है, जबकि 19 अक्टूबर से इनपर रंग का कार्य पूरा हो जाएगा। गाजियाबाद से पहुंचे कलाकार प्रद्युत कुमार पाल, गोरपाल और श्यामलदास इन प्रतिमा को अंतिम रूप देने की तैयारी कर रहे हैं। वर्ष 1993 से मूर्ति का कार्य करने वाले प्रद्युत कुमार ने बताया कि यह सीजन उनके लिए भी अच्छा नहीं रहा।
दुर्गा पूजा से आठ महीने पहले लोग बुकिेग करना शुरू कर देते हैं, लेकिन इस बार जिन्होंने बुकिंग की थी कोरोना के चलते वह कैंसिल हो गई। ऐसे में काम 25 फीसद भी नहीं रहा। उन्होंने बताया कि तीन फीट की प्रतिमा को बनवाने के लिए पांच हजर का खर्चा आता है। इन प्रतिमा को तैयार कर करनपुर, आराघर, सुभाषनगर, ओएनजीसी, रायपुर आदि स्थान पर आयोजन करने वाली समितियां ले जाएंगी। इनमें देवी दुर्गा के अलावा सरस्वती लक्ष्मी, गणेश और कार्तिकेय की प्रतिमा को सजाने का कार्य लगभग पूरा हो चुका है।
रायपुर दुर्गा पूजा समिति की ओर से इस बार आयुष निर्माणी के पंडाल में आयोजन नहीं होगा। कोरोनाकाल के चलते समिति सादगी से बंग भारती क्लब के प्रांगण में 22 की शाम से पूजा करेगी। समिति के अध्यक्ष तापस चक्रवर्ती ने बताया कि सामान्यत: दुर्गा पूजा आश्विन माह में मनाई जाती है, लेकिन अधिमास के चलते पूजा का आयोजन कार्तिक में हो रहा है।
मान्यता है कि देवी दुर्गा अपनी पुत्रियां सरस्वती और लक्ष्मी पत्र गणेश और कार्तिकेय के साथ अपने अपने वाहनों में शारदीय नवरात्र में पृथ्वी पर आती हैं, जिन्हें पूजा जाता है। इस बार कोलकाता से मूर्तिकार और आयोजन में सांस्कृतिक दल के कलाकार नहीं पहुंचे। पूजा के पहले दिन देवी को आभूषणों से सजाया जाता है और देवी के दस भुजाओं में हाथियार सौंपे जाते हैं। रंगीन वेशभूषा कोलकाता से मंगाए जाते हैं, लेकिन कोरोनाकाल के कलाकार न आने के कारण इस बार प्रतिमा गाजियाबाद से मंगवाई गई।
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