समाचार सच, पिथौरागढ़। उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में लगातार हो रही बारिश ने चिंता बढ़ा दी है। थल-मुनस्यारी मोटर मार्ग पर हरड़िया के पास पहाड़ी दरकने से भारी मात्रा में मलबा और विशाल बोल्डर रामगंगा नदी में गिर गए, जिससे नदी का प्रवाह पूरी तरह बाधित हो गया। नदी का पानी रुकने से यहां एक बड़ी झील बन गई है, जिसका जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।
प्रशासन के अनुसार झील का विस्तार भैंसखाल की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में भैंसखाल, बासगुन, छीपा समेत आसपास के पांच गांवों की करीब 600 से 700 लोगों की आबादी पर खतरा मंडरा रहा है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने इलाके में निगरानी बढ़ा दी है और लगातार हालात पर नजर रखी जा रही है।
4 जुलाई को हुई भारी बारिश के बाद पहाड़ से लगातार मलबा और बोल्डर गिरने लगे, जिससे रामगंगा नदी का बहाव रुक गया। पानी का स्तर बढ़ने के कारण नदी पर बने अस्थायी पुल भी बह गए हैं। इन पुलों के जरिए पिथौरागढ़ और बागेश्वर के ग्रामीण रोजाना आवाजाही करते थे। पुल बहने से अब लोगों को लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ रहा है, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है।
यह पहला मौका नहीं है जब इस क्षेत्र में ऐसी स्थिति बनी हो। इससे पहले वर्ष 2013, 2016 और 2024 में भी मलबा जमा होने के कारण रामगंगा नदी में झील बन चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ऐसी झील अचानक टूटती है तो निचले इलाकों में अचानक बाढ़ का बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।
एसडीएम मुनस्यारी डॉ. ललित मोहन तिवारी ने बताया कि हरड़िया समेत संवेदनशील क्षेत्रों का निरीक्षण किया गया है और झील बनने की सूचना जिला प्रशासन को दे दी गई है। हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।
वहीं सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने भी मौके का निरीक्षण किया है। झील के पानी की सुरक्षित निकासी के लिए नया आकलन तैयार किया जा रहा है। साथ ही हरड़िया नाले के चौनलाइजेशन की योजना भी बनाई जा रही है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द राहत कार्य शुरू करने और वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था करने की मांग की है।



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