समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। सनातन धर्म में पितृ पक्ष की सर्वपितृ अमावस्या तिथि का विशेष धार्मिक महत्व है। इस दिन ज्ञात-अज्ञात सभी पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंड दान करके उन्हें विदा किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि इस दिन कुछ सावधानियाँ न बरती जाएँ, तो पितर असंतुष्ट होकर लौट सकते हैं, जिससे परिवार में ‘पितृ दोष’ लग सकता है। पितृ दोष और पितरों की नाराजगी से बचने के लिए सर्वपितृ अमावस्या के दिन निम्नलिखित 10 कार्यों को करने से बचें।
तामसिक भोजन का सेवन न करें
सर्वपितृ अमावस्या के दिन घर में लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा, अंडा या किसी भी प्रकार का तामसिक भोजन न बनाएं और न ही इसका सेवन करें। इस दिन सात्विक आहार ही ग्रहण करना चाहिए।
शुभ व मांगलिक कार्यों की शुरुआत न करें
इस दिन कोई भी नया कार्य, व्यापार की शुरुआत, गृह प्रवेश, मुंडन, सगाई या विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए। पितृ पक्ष मुख्य रूप से पूर्वजों का स्मरण और शोक-श्रद्धा व्यक्त करने की अवधि मानी जाती है।
द्वार पर आए भिक्षुक, पशु या पक्षी का अनादर न करें
सर्वपितृ अमावस्या के दिन यदि कोई याचक (भिक्षुक), गरीब, गाय, कुत्ता या कौआ आपके घर आए, तो उसे खाली हाथ या भूखा न लौटने दें। मान्यता है कि पितर किसी भी रूप में आपके द्वार पर आ सकते हैं।
बाल, दाढ़ी और नाखून न काटें
अमावस्या के दिन बाल कटवाना, शेविंग करना या नाखून काटना वर्जित माना गया है। ऐसा करने से पितृ असंतोष बढ़ता है और घर में नकारात्मक ऊर्जा आती है।
नए वस्त्र या कीमती सामान न खरीदें
इस तिथि पर अपने लिए नए कपड़े, गहने, वाहन या भूमि-भवन की खरीदारी करने से बचना चाहिए। इस दिन केवल पितरों के दान के लिए ही वस्तुएँ खरीदनी चाहिए।
किसी का अपमान, क्लेश या वाद-विवाद न करें
घर में कलह-क्लेश का माहौल न बनने दें। किसी बुजुर्ग, असहाय या महिला का अपमान न करें। पितर उसी घर में प्रसन्न रहते हैं जहाँ शांति और आपसी प्रेम होता है।
तर्पण और श्राद्ध के समय में देर न करें
पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध का कर्म दोपहर के समय (कुतूप और रोहिण मुहूर्त) ही करना चाहिए। सुबह-सुबह या सूर्यास्त के बाद श्राद्ध कर्म करना शास्त्रों में निषेध माना गया है।
लोहे या प्लास्टिक के बर्तनों का प्रयोग न करें
पितरों के श्राद्ध, तर्पण या भोजन अर्पण में लोहे, स्टील या प्लास्टिक के बर्तनों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इसके बजाय तांबा, पीतल, चांदी या पत्तलों (दौने) का उपयोग करें।
तेल मालिश और शारीरिक सुख-सुविधाओं से बचें
इस दिन शरीर पर तेल मालिश करना, इत्र लगाना या अत्यधिक शारीरिक सुख-सुविधाओं में लिप्त होना सही नहीं माना जाता। दिन को सादगी और संयम से व्यतीत करें।
शाम के समय घर में अँधेरा न रखें
सर्वपितृ अमावस्या की शाम को घर के मुख्य द्वार और दक्षिण दिशा में अँधेरा न रहने दें। इस दिन दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों के नाम का दीपक (तिल के तेल या घी का) अवश्य जलाएं ताकि उन्हें अपने लोक लौटने का मार्ग आलोकित मिले।

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