श्राद्ध पक्ष 2026: चतुर्दशी के श्राद्ध का क्या है महत्व, जानिए कैसे और किसका होता हैं श्राद्ध

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समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। पितृ पक्ष की चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध (जिसे ‘घात चतुर्दशी’ या ‘शस्त्र हत श्राद्ध’ भी कहा जाता है) अत्यंत विशेष और संवेदनशील माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, यह तिथि केवल उन्हीं पूर्वजों के निमित्त समर्पित होती है जिनकी मृत्यु किसी अस्त्र-शस्त्र, दुर्घटना, ज़हर, अग्नि, आत्महत्या या किसी अन्य प्रकार की हिंसा व अकाल घटना के कारण हुई हो। सामान्य या स्वाभाविक रूप से देह त्यागने वाले पितरों का श्राद्ध इस दिन वर्जित होता है। वर्ष 2026 में चतुर्दशी का श्राद्ध 09 अक्टूबर, शुक्रवार को रखा जाएगा।

तिथि एवं शुभ मुहूर्त (09 अक्टूबर 2026)
चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ: 08 अक्टूबर 2026 को रात 22.15 बजे से
चतुर्दशी तिथि का समापन: 09 अक्टूबर 2026 को रात 21.35 बजे तक

श्राद्ध कर्म के मुख्य मुहूर्त
कुतुप मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ समय): दोपहर 11.45 से 12.31 बजे तक
रोहिणी मुहूर्त: दोपहर 12.31 से 01.18 बजे तक
अपराह्न काल: दोपहर 01.18 से 03.38 बजे तक

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श्राद्ध पूजन की सरल व सटीक विधि
पवित्रता व संकल्प

प्रातःकाल स्नान के पश्चात घर व पूजा स्थल को गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें। तत्पश्चात हाथ में जल लेकर अपने अकाल काल-कवलित पितरों का ध्यान करते हुए श्राद्ध का संकल्प लें।
तर्पण व पिंडदान
‘कुतुप काल’ में दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल, काले तिल, जौ और सफेद पुष्प मिलाकर पितरों का तर्पण करें। इसके बाद जौ के आटे, पके चावल और काले तिल से पिंड निर्मित कर अर्पित करें।
पंचबलि विधान
निर्मित सात्विक भोजन में से सबसे पहले गौमाता, कुत्ते, कौवे, देव बल और चींटियों के लिए पाँच अंश (पंचबलि) निकालकर अलग रखें।
ब्राह्मण भोजन
सात्विक आहार (खीर, पूरी, सब्जी आदि) तैयार करके योग्य ब्राह्मणों को आदरसहित भोजन कराएं। ध्यान रखें कि भोजन बनाते समय मन शांत और मौन रहे।
दान एवं दक्षिणा
भोजन के उपरांत ब्राह्मणों को सामर्थ्य अनुसार वस्त्र, अन्न व दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लें। इसके पश्चात ही परिवार के सदस्य भोजन ग्रहण करें।

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ध्यान रखने योग्य मुख्य बातें
स्वाभाविक मृत्यु के लिए वर्जित

स्वाभाविक रूप से मृत पूर्वजों का श्राद्ध इस दिन भूलकर भी न करें। उनका श्राद्ध उनकी निज तिथि या ‘सर्वपितृ अमावस्या’ को ही किया जाना चाहिए।
पूर्ण सात्विकता
भोजन पकाने और पूजन सामग्री में पूर्ण शुद्धता का पालन करें। तामसिक तत्वों (लहसुन, प्याज आदि) का प्रयोग पूरी तरह वर्जित रखें।
पवित्र व शांत वातावरण
श्राद्ध कर्म पूरी श्रद्धा, सत्य और निष्ठा के साथ संपन्न करें। इस दौरान घर में किसी भी प्रकार का कलह, नकारात्मक विचार या अशांति न होने दें।
महात्म्य
अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए पितरों का चतुर्दशी तिथि पर विधि-विधान से किया गया यह तर्पण उनकी आत्मा को भटकने से मुक्ति दिलाकर मोक्ष प्रदान करता है और परिवार को उनके प्रकोप या पितृदोष से रक्षा करता है।

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